//सफलता की कहानी// *पी.एम.एफ.एम.ई.योजना का लाभ लेकर पूजादेवी ने लगाया गेहूं प्रसंस्करण उद्योग* *पूजादेवी प्रति वर्ष 30 से 35 लाख रूपये की कर रही है कमाई* *पांच से सात बेरोजगार युवाओं को प्रदान कर रही है रोजगार*
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नीमच 30 दिसम्बर 2025, प्रधानमंत्री सूक्ष्म, खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पी.एम.एफ.ई.एम.ई.) योजना का लाभ लेकर नीमच जिले के मनासा विकासखण्ड के ग्राम हांसपुर निवासी श्रीमती पूजादेवी कुशवाह आज सफल उद्यमी बन गई है। पी.एम.एफ.एम.ई. योजना के तहत पूजादेवी ने सेंट्रल बैंक आफ इंडिया मनासा शाखा से 50 लाख रूपये का ऋण प्राप्त कर, सेठ श्री फुड प्रोसेसिंग उद्योग स्थापित किया।
इस पर शासन की ओर से पूजादेवी को 10 लाख रूपये का अनुदान भी मिला है।
हासपुर निवासी पूजादेवी कुशवाह पति डालूराम कुशवाह, शिक्षित गृहणी है। खेतीबाडी का पुस्तैनी कार्य होने के कारण उसे व्यवसायिक रूप देने की इच्छा उनके मन में हमेशा से रही है।
पारिवारिक पृष्ठभूमि और आर्थिक रूप से असक्षम होने से वे अपनी इस इच्छा को पूरा नहीं कर पा रही थी, ऐसे में उन्हें पी.एम.एफ.एम.ई. योजना के बारे में पता चला। उन्होने उद्यानिकी विभाग नीमच से संपर्क कर, गेहूं प्रसंस्करण उद्योग लगाने की इच्छा जताई। इस पर विभाग ने श्रीमती पूजा कुशवाह को पी.एम.एफ.एम.ई. योजना के तहत गेहूं प्रसंस्करण उद्योग लगाने के लिए प्रकरण तैयार करवाकर स्वीकृति के लिए बैंक शाखा को भिजवाया। जहां से उसे 50 लाख रूपये का ऋण स्वीकृत हुआ और शासन द्वारा 10 लाख का अनुदान भी प्रदान किया गया।
श्रीमती पूजादेवी ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उन्नयन योजना के तहत मिली ऋण राशि से अपने गांव में ही सेठश्री फुड प्रोसेसिंग ईकाई स्थापित की और गेहूं का प्रसंस्करण कर अमृत कुंभ, नरमपूडी, गोलचा सेट ब्रांड के नाम से गेहूं का आटा तैयार करने लगी है। श्रीमती पूजादेवी अपने उत्पादों का पंजीकरण करवाकर अहमदाबाद, जयपुर के साथ ही स्थानीय बाजार में विक्रय कर अच्छा लाभ कमा रही है। गुणवत्ता पूर्ण उत्पाद, बेहतर विक्रय प्रबंधन ओर समय पर आपूर्ति के कारण पूजादेवी के उत्पादों ने आसपास के बाजारों में भी अपनी विशेष पहचान बनाई है।
गेहूं प्रसंस्करण ईकाई स्थापित कर श्रीमती पूजादेवी आज सफल उद्यमी बन गई है। उनका वार्षिक टर्न ओवर 60 से 70 लाख रूपये है और वार्षिक आमदनी 30 से 35 लाख रूपये है। अब श्रीमती पूजादेवी आर्थिक रूप से सक्षम बन गई है। उसने सफल महिला उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बना ली है। वे अपने उद्योग में 5 से सात अन्य बेरोजगार युवाओं को भी रोजगार दे रही है।




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