*किसान को अपराधी न समझें, उसकी मजबूरी समझें: पराली प्रबंधन पर एक कड़वा सच*
जन जागृति संगम न्यूज 9302003334 आज जब भी प्रदूषण की बात होती है, तो सबसे पहले उंगली किसान और उसकी जलती हुई पराली पर उठाई जाती है। हम स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि कोई भी किसान खुशी से पराली नहीं जलाता, क्योंकि वह जानता है कि उस आग में उसके खेत के मित्र कीट और मिट्टी की ताकत भी जल रही है।🔥🔥🔥🔥🔥 लेकिन क्या कभी किसी ने किसान के बजट और उसकी तंग समय सीमा (Deadline) पर गौर किया है? एक तरफ समय की कमी, दूसरी तरफ जेब पर मार फसल कटाई के तुरंत बाद अगली फसल की तैयारी करनी होती है। खेत से अवशेष हटाने के लिए रोटावेटर और अन्य आधुनिक मशीनों का खर्च 2500 से 3000 रुपये प्रति एकड़ तक बैठता है। डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच एक सामान्य किसान के लिए यह अतिरिक्त बोझ उठाना संभव नहीं है। 🔥🔥🔥🔥🔥🔥 हमारी मांग: जुर्माना नहीं, सहयोग चाहिए अगर शासन-प्रशासन वाकई में पर्यावरण को लेकर गंभीर है, तो उसे किसान पर कार्रवाई करने के बजाय मदद का हाथ बढ़ाना चाहिए: 🔥🔥🔥🔥🔥🔥 खर्च का भुगतान: खेत में रोटावेटर चलाने या पराली को मिट्टी में मिलाने पर आने वाला खर्च सरकार वहन करे। इंसेंटिव (प्रोत्साहन राशि): जो किसान पराली नह...