*देश का पहला लोककला गुरुकुल तैयार होगा खजुराहो में:गुरुकुल में विलुप्त होती लोककलाओं के कलाकार तैयार किए जाएंगे, 200 लोगों की क्षमता*

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हस्तशिल्प के केंद्र खजुराहो में देश का पहला लोककला गुरुकुल तैयार किया जा रहा है। खजुराहो में आदिवर्त जनजातीय लोक कला राज्य संग्रहालय के ठीक सामने 5 करोड़ रुपए की लागत से गुरुकुल का निर्माण किया जा रहा है। लोककलाओं के गुरुकुल का निर्माण मध्य प्रदेश के संस्कृति विभाग द्वारा किया जा रहा है।
यह देश का पहला गुरुकुल होगा जहां लोककला परंपराओं, काष्ट शिल्प, हस्त शिल्प, लोह शिल्प, लोक नृत्य, लोकगीत, लोक संगीत सहित विभिन्न लोककलाओं को सिखाया जाएगा। अभी पारंपरिक तौर पर कलाकार प्रस्तुत करते हैं। कई लोककलाएं विलुप्त होने की कगार पर हैं। गुरुकुल के माध्यम से नए कलाकारों तैयार करके लोककलाओं का संरक्षण किया जाएगा।

इस गुरुकुल में 250 कलाकार एक साथ, अलग अलग विधाओं को गुरुओं के माध्यम से सीख सकेंगे। यह गुरुकुल पांच करोड़ की लागत से बनाया जा रहा है। मध्य प्रदेश के संस्कृति विभाग ने लोककला गुरुकुल का निर्माण मुख्यमंत्री मोहन यादव की घोषणा के बाद किया है।

लोकसभा चुनाव से पहले खजुराहो में एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री लोककला गुरुकुल के निर्माण का ऐलान किया था। मुख्यमंत्री ने यह घोषणा सांसद वीडी शर्मा और विधायक अरविंद पटेरिया की मांग पर की थी।

हर सुविधा से संपन्न ऑडिटोरियम और स्टूडियो भी बनाया जाएगा
नृत्य और गायन के लिए 200 व्यक्तियों की क्षमता का खुला मंच और संपूर्ण सुविधाओं से विकसित ऑडिटोरियम, रिकार्डिंग के लिए सुसज्जित स्टूडियो का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है। इन सभी निर्मितियों के साथ जनसुविधाएं और ग्रीनरूम भी निर्मित होंगे। परिसर में एक वाटर बॉडी भी विकसित की जाएगी, जो अग्निशमन के संयंत्र के पानी के स्टोरेज की तरह भी इस्तेमाल होगी।

शिल्प विधाओं के लिए पांच अलग-अलग गैलरी होंगी
निर्माणाधीन गुरुकुल में एक साथ पांच शिल्प विधाओं में प्रशिक्षण-परिस्कार की व्यवस्था की जाएगा। पांच अलग-अलग निर्मितियां (गैलरी) ग्रामीण परिवेश के अनुकूल तैयार की जाएंगी। जहां शिल्प के निर्माण की तकनीक सिखाने के लिए परिवेश की रचना के साथ ही कच्ची सामग्री के भंडारण की व्यवस्था भी रखी जाएगी। संपूर्ण परिसर में ग्रामीण परिवेश के अनुकूल लैंडस्केपिंग भी की जाएगी।

गुरुकुल में वरिष्ठ कलाकार ही देंगे प्रशिक्षण

मप्र संस्कृति विभाग के अशोक मिश्रा ने बताया लोककला गुरुकुल में प्रशिक्षकों की स्थाई नियुक्ति नहीं की जाएगी। वरिष्ठ कलाकार ही प्रशिक्षक होंगे। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि बांस की टोकरी बनाने वाले शिल्पकार गुरुकुल में आकर नए लोगों को टोकरी बुनने की कला सिखाएंगे। ऐसे ही अन्य विधाओं का होगा। अलग-अलग समय पर भिन्न भिन्न विधाओं बैच बनाकर कलाकारों को आमंत्रित किया जाएगा।

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