*शिशु मृत्यु दर में मप्र देश में पहले स्थान पर: SRS रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा, कांग्रेस ने सरकार को घेरा*

जन जागृति संगम
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भोपाल। सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) की हालिया रिपोर्ट ने मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, देश में सबसे ज्यादा शिशु मृत्यु दर (Infant Mortality Rate - IMR) मध्यप्रदेश में दर्ज की गई है। यहां हर 1000 जीवित जन्मों पर 40 नवजात अपना पहला जन्मदिन भी नहीं मना पाते।

इस खुलासे के बाद कांग्रेस ने राज्य सरकार को घेरते हुए इसे ‘बीमार सरकार’ बताया और सीधा सवाल दागा कि हर साल स्वास्थ्य और पोषण पर खर्च होने वाला हजारों करोड़ का बजट आखिर कहां जा रहा है?

*क्या कहती है रिपोर्ट ?-:*
SRS बुलेटिन 2022 के अनुसार, भारत में शिशु मृत्यु दर में पिछले कुछ दशकों में गिरावट दर्ज हुई है। 1971 में जहां यह आंकड़ा 129 प्रति हजार था, वहीं अब यह घटकर 26 प्रति हजार रह गया है। लेकिन मध्यप्रदेश अब भी इस सुधार में पिछड़ता नजर आ रहा है।
देश के ग्रामीण क्षेत्रों में यह दर 29, जबकि शहरी क्षेत्रों में 18 है। मगर मध्यप्रदेश में औसतन 40 शिशु प्रति 1000 जन्म पर काल का ग्रास बन जाते हैं, जो राष्ट्रीय औसत से कहीं ज्यादा है।

*कांग्रेस का हमला: ‘बीमार है सरकार’-:*
कांग्रेस प्रवक्ता भूपेंद्र गुप्ता ने SRS रिपोर्ट को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा, हर साल 4500 करोड़ रुपये का बजट पोषण और मातृत्व योजनाओं पर खर्च होता है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। CAG रिपोर्ट हर साल पोषण घोटाले की पोल खोलती है, फिर भी कार्रवाई नहीं होती। उन्होंने यह भी जोड़ा कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिशु मृत्यु दर शहरी क्षेत्रों की तुलना में डेढ़ गुना ज्यादा है, जो दर्शाता है कि गांवों में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह जर्जर हैं।

*मातृ मृत्यु दर भी गंभीर विषय-:*
सिर्फ शिशु ही नहीं, माताओं की मौत की दर भी चिंता का विषय है। मध्यप्रदेश में मातृ मृत्यु दर प्रति एक लाख प्रसव पर 159 है। जबकि राष्ट्रीय औसत 88 है। इससे स्पष्ट है कि राज्य में मां और बच्चे दोनों ही सुरक्षित नहीं हैं।

*केरल मॉडल की बात करने वाली सरकार अब तक क्या कर रही थी ?-:*
कांग्रेस का कहना है कि अगर राज्य सरकार केरल मॉडल को स्वास्थ्य के क्षेत्र में लागू करना चाहती है, तो अब तक उसे रोक कौन रहा था ? गरीबों और महिलाओं के लिए घोषित योजनाएं सिर्फ फाइलों और घोषणाओं तक सीमित क्यों हैं?

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