*एक विनम्र श्रद्धांजलि ***
जन जागृति संगम न्यूज
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प्रकृति की नियती है जिसे एक बार दुनिया में जन्म लेना है और वापस अनंत यात्रा पर जाना भी है । काल के क्रूर हाथों ने हम सबके काका साहब ( संपत लाल जी पटवा) को हमसे छीन लिया । लेकिन 30 वर्षों के पारिवारिक व जीवंत संपर्क की कुछ बानगी मेरे भी मन मस्तिष्क में विद्यमान है । दिनांक 10 मार्च 1996 को जब दैनिक अमृत मंथन का नीमच जिले से प्रकाशन प्रारंभ हुआ तब दैनिक अमृत मंथन के प्रधान संपादक और अब दैनिक भास्कर के नेशनल एडिटर जो अपनी बेबाक कलम के लिए देश और दुनिया में ख्याति प्राप्त कर चुके श्री नवनीत जी गुर्जर के सानिध्य में अमृत मंथन में संपूर्ण रतलाम जिले का काम करने का अवसर प्राप्त हुआ। यह बताना भी समसामयिक है कि नवनीत जी मेरे फोन के समाचार को लिखते तो मुझे फर्राटेदार बोलने का कह देते और 200 शब्दों का समाचार भी मात्र दो या तीन मिनट में उनकी टेबल पर उतर जाता था । तत्कालीन मुख्यमंत्री आदरणीय श्री सुंदरलाल जी पटवा के राजनीतिक मित्र जावरा विधायक श्री रघुनाथ सिंह आंजना व आपातकाल के 18 माह की अवधि में एक साथ भेरूगढ़ उज्जैन जेल कारागार में साथ-साथ रहे (अब लोकतंत्र सेनानी ) श्री इंद्रमल जी टुकड़िया का हमसफर होकर मैं भी लोकार्पण समारोह में नीमच गया था । अमृत मंथन लोकार्पण समारोह के अतिथियों में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह एवं नई दुनिया के प्रधान संपादक अभय छजलानी थे। लोकार्पण समारोह के पश्चात मुझे भी आदरणीय श्री सुंदरलाल जी पटवा एवं आदरणीय संपत लाल जी पटवा के निवास तिलक विहार पहुंचने का अवसर मिला और विधायक रघुनाथ सिंह आंजना की प्रेरणा व सिफारिश से काका साहब एवं अमृत मंथन से जुड़ने का सौभाग्य प्राप्त हुआ । जब दैनिक अमृत मंथन का कलर संस्करण का लोकार्पण हुआ तब बतोर मुख्य अतिथि केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री श्री थावरचंद जी गहलोत के साथ नीमच जाने का अवसर प्राप्त हुआ । अनेक बार अमृत मंथन संवाददाताओं की पारिवारिक मीटिंग में सरल एवं सुलभ काका साहब जैसे मार्गदर्शक से मिलने, सीखने और संवाद के अवसर मिले । ऐसे व्यक्तित्व के महाप्रयाण से संपूर्ण मालवांचल में शोक व्याप्त है। ऐसे अपनत्व सौम्य आत्मीयता एवं सदाशय व्यक्तित्व को कोटि-कोटि वंदन एवं विनम्र श्रद्धांजलि । *श्रद्धावनत - जगदीश राठौर पत्रकार***

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