*TET का टंटा — 28 साल से पढ़ाने वाले मास्टर जी अब ‘अयोग्य’ कैसे हो गए साहब?*
जन जागृति संगम
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*हुकूमत समाचार*
भोपाल। “जिनकी उंगली पकड़कर अफसर बनना सीखा, आज उन्हीं मास्टर जी को सरकार कह रही है — पहले इम्तिहान दो, फिर क्लास लो!”
मध्य प्रदेश में इस वक्त चूल्हे से ज्यादा *TET का मुद्दा* गरम है। मामला इतना तीखा है कि शासन-प्रशासन के मुंह में मिर्च लग गई है और 2 लाख शिक्षकों के पेट में आग।
### *TET का बवाल है क्या?*
*1. एंट्री सीन: सुप्रीम कोर्ट का हंटर*
1 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा — RTE एक्ट के तहत क्लास 1 से 8 तक पढ़ाने वाले हर शिक्षक के पास TET होना ही चाहिए। चाहे वो 1998 में लगा हो या 2010 में।
*2. MP सरकार का ट्विस्ट: ‘2 साल में TET पास करो वरना कुर्सी खाली करो’*
लोक शिक्षण संचालनालय ने 3 मार्च को आदेश फेंक दिया — जुलाई-अगस्त 2026 में TET होगा। जो पास नहीं करेगा, उसे
*अनिवार्य सेवानिवृत्ति*।
टारगेट पर हैं 1998, 2001, 2003, 2006, 2009, 2010 में भर्ती हुए करीब *1.5 से 2.1 लाख शिक्षक*। रिटायरमेंट में 5 साल से कम बचे हैं तो छूट, वरना परीक्षा हॉल में हाजिरी लगाओ।
*3. सबसे बड़ा तड़का: पुराने ‘व्यापम पास’ भी लपेटे में*
2005 और 2008 में व्यापम की पात्रता परीक्षा पास करके लगे 70 हजार शिक्षक भी अब शक के घेरे में। उनका सवाल सीधा है — “तब तो हम योग्य थे, अब 20 साल बाद अचानक अयोग्य कैसे हो गए?”
### *मास्टर जी का दर्द: 28 साल पढ़ाया, अब खुद का पर्चा हल करें?*
रायसेन की *नेहा पटेल* 28 साल से पढ़ा रही हैं। उनके पढ़ाए बच्चे SDM-कलेक्टर बन गए। अब DPI कह रहा है — “मैडम, आप TET दो”। नेहा दीदी पूछती हैं — “मेरी क्लास से निकले अफसर योग्य, और मैं अयोग्य?”
अशोक नगर की *संगीता कुशवाहा* का पंच और तीखा है — “योग्यता का पैमाना सिर्फ मास्टर पर क्यों? कलेक्टर, डॉक्टर, इंजीनियर सबकी 20 साल बाद फिर परीक्षा लो ना। सिर्फ शिक्षक ही सॉफ्ट टारगेट क्यों?”
### *मंदसौर से उठी चिंगारी, भोपाल तक पहुंची लपट*
मंदसौर बना इस आंदोलन का ‘जलियांवाला बाग’। यहां 21 दिन से क्रमिक भूख हड़ताल चल रही है। 18 अप्रैल को यहीं से हजारों TET-विरोधी शिक्षक भोपाल कूच करेंगे। मांग दो टूक “या तो आदेश वापस लो, या फिर हम सबको 10 लाख का बीमा दो, क्योंकि TET के टेंशन से BP-शुगर बढ़ रहा है।”
### *सरकार की दुविधा: कानून बनाम इमोशन*
*सरकार का तर्क*: शिक्षा की गुणवत्ता चाहिए तो एक समान मानक जरूरी। TET से क्वालिटी सुधरेगी।
*शिक्षकों का पलटवार*: 1997-98 में संविदा शाला शिक्षक भर्ती नियम थे। तब TET का जन्म ही नहीं हुआ था। अब नए नियम पुरानी भर्ती पर थोपना *‘रिट्रोस्पेक्टिव अन्याय’* है।
कानूनी पेंच भी फंसा है: RTE एक्ट 2009 में आया, लागू 23 अगस्त 2010 से हुआ, और TET 2011 से शुरू। तो 2011 से पहले वालों पर कैसे लागू?
### *आगे क्या? 3 सीन बाकी हैं पिक्चर में*
*सीन 1: कोर्ट रूम ड्रामा*
शिक्षक संगठन 15 मार्च को बैठक कर सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन डाल रहे हैं।
*सीन 2: सड़क पर संग्राम*
18 अप्रैल को भोपाल के नीलम पार्क में ‘TET वापस लो’ महापड़ाव। मंदसौर, नीमच, रतलाम से 15 हजार शिक्षकों के पहुंचने का दावा।
*सीन 3: सरकार का क्लाइमेक्स* — या तो DPI आदेश में संशोधन कर पुराने शिक्षकों को छूट दे, या फिर 2 लाख परिवारों की बद्दुआ ले।
### *जनहित का सवाल: मास्टर रोएगा तो देश कैसे पढ़ेगा?*
जब 55 साल का शिक्षक रात में TET के फॉर्मूले रटेगा तो सुबह बच्चों को क्या खाक पढ़ाएगा? जब नौकरी का डर होगा तो क्लास में कॉन्फिडेंस कहां से आएगा?
शासन-प्रशासन के लिए यह टेस्टी नहीं, टेस्टिंग टाइम है। या तो
*‘शिक्षक सम्मान बचाओ अध्यादेश’* लाकर 2011 से पहले वालों को छूट दो, या फिर मान लो कि आने वाले चुनाव में 2 लाख शिक्षक + उनके परिवार = 10 लाख वोट का नुकसान पक्का है।
*बॉटम लाइन*: TET जरूरी है, पर नियम का डंडा उन पर न चलाओ जिन्होंने बिना TET के ही ये नियम बनाने वाले अफसर पैदा किए हैं। वरना 18 अप्रैल को भोपाल की सड़कें बताएंगी कि मास्टर जी सिर्फ चॉक नहीं, चिंगारी भी चलाना जानते हैं।
*सम्पादक*

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