*रतलाम जिला अस्पताल सिविल सर्जन मारपीट मामला:जिसे आरोपी बनाया, उसकी मां ने सिविल सर्जन पर लगाए रुपए मांगने के आरोप; कलेक्टर से शिकायत*

जन जागृति संगम न्यूज़ 

रतलाम जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. एमएस सागर पर हुए हमले के मामले ने तुल पकड़ लिया है। जिन युवकों पर मारपीट का आरोप लगा है उनमें से एक की मां ने सिविल सर्जन के खिलाफ आंख के ऑपरेशन के रुपए मांगने का आरोप लगाया। मंगलवार को महिला के परिजनों ने सिविल सर्जन के खिलाफ कलेक्टर को शिकायत की। इसके पहले स्टेशन रोड थाने में भी शिकायत कर चुके हैं।

बता दें कि शुक्रवार रात सिविल सर्जन डॉ. सागर के हॉस्पिटल से घर जाने के दौरान दो से तीन युवकों ने उन पर अस्पताल परिसर में हमला कर दिया था। शोर मचाया तो हमला करने वाले युवक भाग गए। इस दौरान एक युवक वहां मौजूद लोगों के हाथ लग गया था। उसकी पिटाई हो गई। पुलिस युवकों की तलाश कर थाने ले आई। सिविल सर्जन के साथ सभी डॉक्टर कलेक्टर राजेश बाथम के पास पहुंच गए। कलेक्टर से मिलने के बाद सिविल सर्जन डॉ. एमएस सागर ने अस्पताल के ही डॉ. जीवन चौहान एवं डॉ. रवि दिवेकर द्वारा हमला कराने का आरोप लगाया। हालांकि दोनों डॉक्टरों ने सिविल सर्जन के आरोपों को झूठा करार दिया था।

डॉक्टर्स समेत इनके खिलाफ FIR दर्ज हो चुकी
डॉ. सागर की रिपोर्ट पर हमले वाले दिन ही पुलिस ने जितेंद्र उर्फ जीतू पिता फकीरचंद चौधरी, भगत सिंह पिता कन्हैयालाल डोडियार, सुनील पिता भागीरथ मचार के खिलाफ सरकारी काम में बाधा, मारपीट और डॉक्टर प्रोटेक्शन एक्ट में केस दर्ज किया था। तीनों को जेल भेजा जा चुका है।

सिविल सर्जन पर ऑपरेशन के बदले रुपए मांगने का आरोप
जिस मुख्य युवक पर मारपीट का आरोप लगा है उसकी मां गीता बाई ने सिविल सर्जन डॉ. एमएस सागर पर रुपए मांगने के आरोप लगाए हैं। गीता बाई ने शुक्रवार रात को ही स्टेशन रोड थाने पर सिविल सर्जन के खिलाफ थाने पर आवेदन दिया था। गीता बाई के अनुसार 3 अक्टूबर को जिला अस्पताल में डॉ. एमएस सागर ने उनकी एक आंख का मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया था। ऑपरेशन के पहले उन्होंने 15 हजार रुपए मांगे थे। जिसमें से 7 हजार रुपए दे दिए। लेकिन आंख में दिक्कत होने पर बीच में एक बार बहू को लेकर डॉ. सागर के पास गई। लेकिन उन्होंने नहीं देखा।

शुक्रवार को तकलीफ होने के कारण बेटे को बताया। बेटे को लेकर अस्पताल पहुंची। डॉक्टर के पास पहुंचे लेकिन वह उन्होंने सही तरीके से देखा नहीं। धमकी दे दी कहां आंख का परदा खराब है। बेटे ने कहा सरकारी हॉस्पिटल में रुपए किस बात के लेते है तो उन्होंने गाली गलौज की। बेटे के साथ मारपीट करने लगे और भी कुछ लोग आ गए। बेटे को मारा। मैं वहां अकेली थी। कुछ नहीं कर पाई। थाने पर डॉ. सागर के खिलाफ आवेदन दिया है।

आरोप- बाहर से मरीजों से दवाई मंगाई जाती है
आज (मंगलवार) महिला के परिजनों ने सिविल सर्जन डॉ. एमएस सागर के खिलाफ कलेक्टर के नाम शिकायत की। कलेक्ट्रेट पहुंच शिकायती आवेदन तहसीलदार ऋषभ ठाकुर को सौंपा। बताया कि पूरी राशि नहीं देने पर मेरे बेटे जीतू चौधरी के साथ गाली, गलौज कर मारपीट की गई। मेरे आंख का ऑपरेशन भी बिगाड़ दिया। इनके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाए।

परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि जिला अस्पताल में सर्जरी विभाग के कर्मचारी ऑपरेशन के लिए 5 से 10 हजार रुपए मांगते हैं। डिलीवरी व सोनोग्राफी में भी रुपए की मांग की जाती है। बाहर से मरीजों से दवाई मंगाई जाती है। इन सभी कर्मचारियों द्वारा रुपए का हिस्सा सिविल सर्जन को भी जाता है। सिविल सर्जन डॉ. एमएस सागर पर रुपए मांगने के आरोप को लेकर उन्होंने कुछ भी कहने से मना कर दिया। उनका कहना है कि आरोप तो कोई भी लगा सकता है।

दो डॉक्टरों पर हमले का था आरोप
इस पूरे घटनाक्रम में सिविल सर्जन डॉ. सागर ने जिला अस्पताल के दो डॉक्टरों जीवन चौहान व डॉ. रवि दिवेकर पर हमला कराने का आरोप लगाया था। दरअसल दोनों डॉक्टरों के खिलाफ अलग-अलग मामले में संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं मध्यप्रदेश से नोटिस जारी हुआ था। जिसकी जांच सिविल सर्जन डॉ. सागर ने कराई थी। जिसमें दोनों डॉक्टरों को दोषी माना था।

इसको लेकर सिविल सर्जन ने अपने ऊपर शुक्रवार रात हमला कराने का आरोप इन दोनों डॉक्टरों पर लगाया था। हालांकि हमले के अगले दिन संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं मध्यप्रदेश द्वारा डॉ. जीवन चौहान व डॉ. रवि दिवेकर को संस्पेंड कर रतलाम से बाहर अन्य जिलो में भेज दिया है। जबकि डॉ. जीवन चौहान व डॉ. रवि दिवेकर ने सिविल सर्जन के आरोपों को झूठा बताया था।

मेरे पास शिकायत नहीं आई सीएचएमओ
सीएचएमएओ डॉ. आनंद चंदलेकर ने कहा कि सिविल सर्जन के साथ किसी व्यक्ति ने मारपीट की है जो कि किसी मरीज के परिजन थे। हमला करना निंदनीय कृत्य है। कलेक्टर ने आगे की कार्रवाई की है। कलेक्टर के निर्देश पर किसी नर्सिंग होम के विरुद्ध जांच हुई है। वह किस संबंध में हुई उस बारे में मुझे जानकारी नहीं है। दो डॉक्टरों के विरुद्ध सिविल सर्जन ने कार्रवाई की थी। किसी तस्कर के मरीज को भर्ती कर लिया था। उस विषय में कार्रवाई की

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