*दिल के छेद को बिना सर्जरी के पैरों की नसों से बंद करने में मिली सफलता*
जन जागृति संगम
दिल के छेद को इलाज करने के लिए अब एक नई, सुरक्षित और कम-invasive तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे मरीजों को ओपन हार्ट सर्जरी के बिना ही राहत मिल रही है। हाल ही में, एम्स रायबरेली, छत्तीसगढ़ के श्री बालाजी हॉस्पिटल और नोएडा के फेलिक्स हॉस्पिटल में डॉक्टरों ने यह तकनीक अपनाकर दिल के छेद (एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट) को पैरों की नसों के माध्यम से बंद किया।
इन सफल प्रक्रियाओं में, न्यूनतम इनवेसिव विधि का उपयोग किया गया, जिसमें एक पतली, लचीली ट्यूब (कैथेटर) को पैरों की नसों से दिल तक पहुँचाया गया, जिससे दिल का छेद बिना किसी बड़ी सर्जरी के बंद किया गया। इस प्रक्रिया ने न केवल मरीजों के इलाज को सरल और सुरक्षित बनाया, बल्कि उनका रिकवरी समय भी कम कर दिया।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तकनीक से दिल की बीमारियों के इलाज में नई उम्मीदें जागी हैं, और इसे भविष्य में और भी मरीजों के लिए उपयोगी माना जा रहा है।
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