*वन विभाग की बड़ी कार्रवाई, मनासा के मोकड़ी क्षेत्र में 12 हेक्टेयर वन भूमि अतिक्रमण से मुक्त* *तीन दिवसीय अभियान चलाकर अवैध कब्जे के प्रयास किए विफल*
जन जागृति संगम न्यूज
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नीमच। वन क्षेत्र में हो रहे अतिक्रमण के खिलाफ नीमच वन विभाग ने सख्त कार्रवाई करते हुए बड़ी सफलता हासिल की है। विभाग द्वारा लगातार तीन दिनों तक चलाए गए विशेष अभियान में मनासा क्षेत्र की बीट मोकड़ी में करीब 12 हेक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराकर सुरक्षित किया गया। वन विभाग की इस कार्रवाई से अतिक्रमणकारियों में हड़कंप मच गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मनासा क्षेत्र अंतर्गत पड़दा सबरेंज की बीट मोकड़ी में कुछ ग्रामीणों द्वारा वन भूमि पर अवैध कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा था। मामले की सूचना मिलते ही वन विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मौके पर पहुंचकर अतिक्रमण के प्रयासों को विफल कर दिया।
वन विभाग द्वारा चलाए गए इस तीन दिवसीय अभियान के तहत 5 मई को बीट मोकड़ी के कक्ष क्रमांक 298 में लगभग 4 हेक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया। इसके बाद 6 मई को उसी कक्ष में करीब 2 हेक्टेयर भूमि पर हो रहे कब्जे के प्रयास को हटाया गया। वहीं 7 मई को कक्ष क्रमांक 297 में करीब 6 हेक्टेयर वन भूमि पर किए जा रहे अतिक्रमण को भी सफलतापूर्वक हटाया गया। इस प्रकार कुल 12 हेक्टेयर वन भूमि को सुरक्षित किया गया।
वन विभाग ने भविष्य में दोबारा अतिक्रमण न हो, इसके लिए मौके पर जेसीबी मशीनों की सहायता से डबरा-डबरी कंटूर ट्रेंच का निर्माण कराया। साथ ही वन एवं राजस्व भूमि की स्पष्ट पहचान और सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सीपीटी (CPT) की गहरी खुदाई कर स्थायी सीमा रेखा भी निर्धारित की गई।
यह पूरी कार्रवाई वन संरक्षक उज्जैन आलोक पाठक एवं वन मंडलाधिकारी नीमच एस. के. अटोदे के निर्देशन में संपन्न हुई। अभियान में उप वन मंडल अधिकारी मनासा दशरथ अखंड के मार्गदर्शन तथा परिक्षेत्राधिकारी शाश्वत द्विवेदी के नेतृत्व में वन विभाग की टीम ने सक्रिय भूमिका निभाई।
कार्रवाई में परिक्षेत्र सहायक नवल कुमार सिकरवार, जगदीश भास्कर, आशीष प्लास सहित वनरक्षक हेमंत बसेर, जगदीश परमार, अक्षय शर्मा, महेश पाटीदार, हरि सिंह चौहान, दुर्लभ सिंह राठौड़, ईश्वर सिंह चौहान, मुकेश डिगा, कार्यवाहक वनपाल श्रीमती ललिता शक्तावत एवं वनरक्षक श्रीमती वर्षा खींची सहित विभागीय अमले ने सहभागिता निभाई।
वन विभाग अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि वन भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भविष्य में भी इस तरह की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।
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