*1 लाख की रिश्वत लेते पकड़े गए हॉस्टल अधीक्षक पर 10 दिन बाद भी कार्रवाई नहीं, सस्पेंशन में देरी पर उठे सवाल*
जन जागृति संगम न्यूज
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नीमच। उत्कृष्ट सीनियर बॉयज हॉस्टल के अधीक्षक हरीश चौहान को लोकायुक्त पुलिस द्वारा 1 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किए जाने के दस दिन बाद भी आदिम जाति कल्याण विभाग ने उन्हें निलंबित नहीं किया है। विभाग की इस कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
*जानकारी के अनुसार,* लोकायुक्त उज्जैन की टीम ने 25 जून को जिला संयोजक कार्यालय में कार्रवाई करते हुए अधीक्षक हरीश चौहान को एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। कार्रवाई के बाद आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया।
घटना के बाद विभाग ने 1 जुलाई को एक आदेश जारी कर हरीश चौहान को उत्कृष्ट सीनियर बॉयज हॉस्टल के प्रभार से हटा दिया तथा कॉलेज हॉस्टल के अधीक्षक चंद्रशेखर राठौर को अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया। हालांकि, उन्हें अब तक औपचारिक रूप से निलंबित नहीं किया गया है।
इस मामले में विभाग के रवैये पर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि सामान्य प्रशासनिक मामलों या छोटी अनियमितताओं में भी अधीक्षकों के खिलाफ तत्काल निलंबन की कार्रवाई की जाती रही है। ऐसे में रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार हुए अधिकारी के मामले में देरी को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चाएं हो रही हैं।
सूत्रों के अनुसार, निलंबन में हो रही देरी के कारण कार्यालय में मौजूद वित्तीय एवं प्रशासनिक अभिलेखों से छेड़छाड़ या पैसों के लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों के प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा रही है। हालांकि, इस संबंध में विभाग की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
फिलहाल, लोकायुक्त की जांच अपनी प्रक्रिया के अनुसार जारी है, जबकि विभाग की ओर से निलंबन संबंधी आदेश का इंतजार किया जा रहा है।
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*आखिर क्यों नहीं छोड़ रहा छात्रावास। हरीश चौहान, 1 लाख ₹ की रिश्वत में लोकायुक्त उज्जैन द्वारा 25 जून 26 को किया गया था गिरफ्तार* पूरी पोस्ट 👇🏻
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