*हवा में तैरती अंतरिक्ष पार्श्वनाथ की प्रतिमा*
जन जागृति संगम न्यूज
(जेपी तेलकार, 9303273037)
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पिपलिया स्टेशन (निप्र)। जैन धर्म के प्राचीन व चमत्कारिक तीर्थों में शामिल अंतरिक्ष पार्श्वनाथ की महिमा का वर्णन करते हुए सूरत से आए निमेशभाई शाह ने प्रतापगढ़ में गुमानजी के मंदिर में आयोजित भावयात्रा के दौरान प्रतिमा की विशेषता बताई। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष पार्श्वनाथ की पद्मासन मुद्रा में विराजित प्रतिमा के बीच से कपड़ा आर-पार निकाला जा सकता है।
प्रतिमा के इसी अद्भुत स्वरूप के कारण इसे अंतरिक्ष पार्श्वनाथ के नाम से जाना जाता है। बताया गया कि यह प्राचीन प्रतिमा महाराष्ट्र के सिरपुर स्थित जैन मंदिर में स्थापित है और भारतवर्ष के 108 प्रमुख पार्श्वनाथ तीर्थों में इसका विशेष महत्व माना जाता है।
प्राचीन ग्रंथों में वर्णित मान्यता के अनुसार इस प्रतिमा का निर्माण रामायण काल में रावण के बहनोई खर-दूषण द्वारा करवाया गया था। मान्यता है कि प्रतिमा को गाय के गोबर एवं बालू से निर्मित करवाकर मुगलों से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से कुएं में रखा गया था। बही तीर्थ अध्यक्ष अशोक कुमठ ने कहा कि साध्वी मृदुप्रिया के मंगलाचरण के बाद संगीतमय भावयात्रा का शुभारंभ हुआ।
इस दौरान श्रद्धालुओं ने भक्ति एवं आस्था के साथ अंतरिक्ष पार्श्वनाथ की महिमा का गुणगान किया। कार्यक्रम के अवसर पर अतिथियों द्वारा आगामी 30 अगस्त को देशभर के जिनालयों में होने वाले शुद्धिकरण कार्यक्रम के लिए किट का वितरण भी किया गया। आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं समाजजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम में इंदौर के संगीतकार चिराग जैन इंदौर रहे। संचालन राजेश मारवाड़ी ने किया।
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