*हम राम और कृष्ण को मानते लेकिन उनके आदर्शों को आत्मसात नहीं करते : अंतर्राष्ट्रीय वैदिक वक्ता प्रकाश आर्य का उद्बोधन*
जन जागृति संगम
जगदीश राठौर
इंदौर/ आर्य समाज मंदिर महू में महिला सत्संग हुआ । आचार्य रामलाल शास्त्री के आचार्यत्व में यज्ञ संपन्न हुआ जिसमे महिलाओं ने वैदिक मंत्रों से आहुतियां प्रदान की । तत्पश्चात श्रीमती भावना आर्य ने ईश प्रार्थना प्रस्तुत की । सुश्री निधि आर्य ने सुमधुर भजन प्रस्तुत किया तथा " हमें ईश्वर ने मनुष्य योनी किस महान उद्देश्य के लिए प्रदान की और हम कहां भटक रहे " विषय पर अपनी बात रखी । कवित्री बिंदु पंचोली और तृप्ति मिश्रा ने सुंदर कविताएं प्रस्तुत की । सुश्री सुनिधि आर्य ने यज्ञ प्रार्थना के साथ कार्यक्रम का सुंदर संचालन किया । डॉ उषा किरण त्रिपाठी ने वेदों की उत्पत्ति और उनके प्रकार पर महत्वपूर्ण जानकारी दी । श्रीमती गीता आर्य ने संस्कृति के संस्कारों से बच्चों को भी जोड़ने पर बल दिया । कार्यक्रम का समापन अंतर्राष्ट्रीय वैदिक वक्ता प्रकाश आर्य के आध्यात्मिक उद्बोधन से हुआ । आपने कहा कि मनुष्य ईश्वर के सही ज्ञान वेद को छोड़कर वेदना में जी रहा है । राम और कृष्ण का जीवन वेदमय था । हम राम और कृष्ण को तो मानते है और उनके भक्त बनते हैं लेकिन उनके आदर्शों को आत्मसात नहीं करते । यही धर्म की विडंबना है । इस कार्यक्रम महू , कोदरिया , धारनाका , किशनगंज आदि स्थानों से महिलाएं उपस्थित हुई । कार्यक्रम में पुष्पा पाटीदार , सरोज शर्मा , सरिता नेनावा , रेखा गोयल , अंशु दुबे आदि उपस्थित रहीं । आभार प्रदर्शन आर्य राधेश्याम बियाणी ने किया ।

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