बहुत दूर निकल गई मेरी पतंग ए दोस्त ,,,,,,,,,,, आज बहुत ही दु:खी मन से अपने विचार लिख रहा हूं,,,,,,,,,,,,
जन जागृति संगम
बहुत दूर आसमान पर निकल गई थी मेरी पतंग अगर उसको जमीन पर उतारता तो धागा उलझ जाता इसलिए मैंने एक निर्णय लिया धागा तोड़ने का और धागा तोड़ दिया अब वह पतंग लहराते लहराते, बाल खाते-खाते आसमान पर न जाने कहां अटक गई और उसे कोई उतारने वाला नहीं कोशिश करते उतारने की तो वह फट जाती
इसलिए दोस्त आज मैंने बहुत दुखी मंच से अपने विचार व्यक्त किए हैं बहुत दूर निकल गई थी मेरी पतंग आसमान पर अगर उसे उताऱता तो धागा उलझ जाता इसलिए मैंने धागा तोड़ना ही उचित समझा।
अगर टूटे हुए धागे में गठन लगा दो तो वह बहुत तकलीफ देता है दोस्त।
वरिष्ठ समाजसेवी जगदीश सूर्यवंशी,,,,,,,,,

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