येआदिवासी नेता और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ही करवा सकते हैं🔥🔥🔥🔥 बीजेपी विधायक के पेट्रोल पम्प की जांच विधायक जी के बेटे और बेटी के नाम कैसे हो गई आदिवासियों की जमीन? मामला- मध्य प्रदेश के नीमच विधानसभा क्षेत्र के विधायक दिलीपसिंह परिहार के आदिवासी की जमीन पर पेट्रोल पम्प लगाने का🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥 -इन बिंदुओं पर जांच पड़ताल हो तो विधायकजी का बड़ा खेल सामने आएगा
जन जागृति संगम न्यूज
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-इन बिंदुओं पर जांच पड़ताल हो तो विधायकजी का बड़ा खेल सामने आएगा
👉🏼1:-विधायक दिलीपसिंह परिहार को आदिवासी की ही जमीन क्यों दिखीं!
👉🏼2:- आदिवासियो को सरकार पट्टे पर जमीन इस शर्त पर देती है कि वह उसे बेचेगा नहीं। जमीन पर 'अहस्तांतरणीय' (Non-transferable) लिखा रहता है, जिसका अर्थ है संपत्ति जिसे किसी दूसरे व्यक्ति को हस्तांतरित (transfer/बेचा या दिया) नहीं किया जा सकता है।
👉🏼3:- उक्त अहस्तांतरणीय भूमि की तत्कालीन जिलाधीश या अन्य अधिकारी ने कैसे अनुमति जारी कर दी। क्या विक्रेता 01. लालुराम पिता हजारी भील निवासी बरखेडा हाडा 02. प्रेमबाई पति लालुराम भील निवासी बरखेडा हाडा तहसील नीमच को जमीन के बदले जमीन दी गई। क्या आदिवासी किसानों को वर्तमान दर से रुपए दिए गए। क्या धोखें से तो रजिस्ट्री नहीं कराई गई।
👉🏼4:- आदिवासी की जमीन का नामांतरण भी बहुत जल्दी हो गया, क्योंकि विधायक का मामला था। इस प्रकार कई बिंदु हैं, जिनकी जांच निष्पक्ष तरीके से हो तो कई तथ्य सामने आ सकते हैं।
👉🏼5:-क्या विधायक पद का प्रभाव डालकर प्रशासनिक अधिकारियों पर दबाव बनाया गया?
👉🏼6:- 'अहस्तांतरणीय' (Non-transferable) जमीन की रजिस्ट्री और नामांतरण किसके दबाव में हुआ?
👉🏼7:- क्या गरीब आदिवासियों (लालुराम और प्रेमबाई भील) को जमीन के बदले जमीन मिली या सिर्फ धोखा?
👉🏼8:-क्या तत्कालीन जिलाधीश ने नियमों को ताक पर रखकर अनुमति दी?
👉🏼9:- नियमों की अनदेखी: राजस्व नियमों के अनुसार, शासन द्वारा पट्टे पर दी गई आदिवासी जमीन अहस्तांतरणीय होती है। फिर किस आधार पर जिला प्रशासन ने इसे विधायक के परिजनों के नाम करने की अनुमति दी?
👉🏼10:- त्वरित नामांतरण: आम जनता की जमीनों के नामांतरण में महीनों लगते हैं, लेकिन विधायक का मामला होने के कारण इस विवादित जमीन का नामांतरण रिकॉर्ड समय में कर दिया गया। 🔥🔥 जनहित में जारी
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