*श्मशान से बाजार तक: मुर्दों के कपड़ों का करोड़ों का काला कारोबार उजागर* *इंदौर से अहमदाबाद तक फैला नेटवर्क, धोकर-पैक कर फिर बेचे जा रहे अंतिम संस्कार के कपड़े*
जन जागृति संगम न्यूज
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इंदौर। मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर से एक बेहद चौंकाने वाला और संवेदनशील मामला सामने आया है। यहां श्मशान घाटों से मृतकों के उतारे गए कपड़ों को इकट्ठा कर दोबारा बाजार में बेचने का संगठित कारोबार उजागर हुआ है। खुलासे के अनुसार अंतिम संस्कार के दौरान छोड़ी गई साड़ियां, शॉल, कुर्ते और अन्य कपड़ों को एजेंट इकट्ठा करते हैं, जिन्हें बाद में धोकर, प्रेस कर और नई पैकिंग के साथ बाजार में उतार दिया जाता है।
जानकारी के अनुसार यह नेटवर्क इंदौर के कई मुक्तिधामों से संचालित हो रहा है और इसकी सप्लाई गुजरात के अहमदाबाद तक पहुंच रही है। हर महीने लाखों रुपए के इस कारोबार में कई एजेंट, दलाल और व्यापारी शामिल बताए जा रहे हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि आम लोग इन कपड़ों को नया या सेकंड हैंड समझकर खरीद रहे हैं और कई बार शादी-ब्याह, पूजा-पाठ तथा अन्य शुभ कार्यों में भी उपयोग कर रहे हैं।
एजेंटों ने खोले राज
पड़ताल में सामने आया कि श्मशान घाटों पर मौजूद एजेंट अंतिम संस्कार के बाद छोड़े गए कपड़े इकट्ठा करते हैं। इन्हें छोटे व्यापारियों के जरिए बड़े खरीदारों तक पहुंचाया जाता है। वहां कपड़ों की धुलाई, प्रेस और पैकिंग की जाती है ताकि कोई पहचान न सके कि ये कपड़े श्मशान से लाए गए हैं।
रामबाग क्षेत्र के एक एजेंट दिलीप माने ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि अगर कपड़ों से घी और सेंट की गंध खत्म कर दी जाए तो कोई पहचान नहीं सकता कि वे श्मशान के हैं।
मुक्तिधामों में गोदाम, कपड़ों का भारी स्टॉक
पड़ताल के दौरान पंचकुईया और मालवा मिल मुक्तिधाम में ऐसे गोदाम सामने आए जहां बड़ी मात्रा में साड़ियां, शॉल, कुर्ते और अन्य कपड़े जमा पाए गए। बताया गया कि यहां साड़ियां 70 से 80 रुपए, शॉल 20 से 40 रुपए और कुर्ता-पायजामा 45 रुपए तक में बेचे जाते हैं।
बाणगंगा मुक्तिधाम में भी कथित तौर पर बड़ा नेटवर्क सक्रिय मिला, जहां गोदामों में बड़ी मात्रा में कपड़े और अन्य सामग्री रखी गई थी।
अहमदाबाद तक हो रही सप्लाई
जांच में यह भी सामने आया कि इंदौर से इकट्ठा किया गया माल ट्रकों के जरिए गुजरात भेजा जाता है। कारोबार से जुड़े लोगों ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि कपड़ों की बड़ी खेप अहमदाबाद पहुंचती है, जहां से इन्हें आगे बाजारों में सप्लाई किया जाता है।
धार्मिक आस्था और भरोसे से खिलवाड़
यह मामला केवल अवैध कारोबार तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों की धार्मिक भावनाओं और सामाजिक विश्वास से भी जुड़ा है। हिंदू परंपरा में अंतिम संस्कार के दौरान मृतक के कपड़े उतारने की विशेष धार्मिक प्रक्रिया होती है। परिवार शोक में डूबा होता है और बाद में उन कपड़ों का क्या होता है, इस पर शायद ही ध्यान जाता है।
अब सामने आया यह नेटवर्क न केवल कपड़ों बल्कि श्मशान में उपयोग होने वाले बर्तन और अन्य सामग्री तक को दोबारा बाजार में बेच रहा है। इस खुलासे के बाद लोगों में भारी आक्रोश और चिंता का माहौल है। वहीं प्रशासनिक स्तर पर जांच और कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।
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