*10 वर्ष बाद नारायणगढ़ पहुंचे मुनि प्रणम्य सागर महाराज, भव्य मंगल प्रवेश यात्रा में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब*
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पिपलिया स्टेशन (निप्र)। संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर महाराज के शिष्य प्रणम्यसागर महाराज का बुधवार को नगर नारायणगढ़ में भव्य एवं ऐतिहासिक मंगल प्रवेश हुआ। लगभग 10 वर्ष बाद नारायणगढ़ पहुंचे मुनि श्री के स्वागत के लिए समाजजनों में विशेष उत्साह और श्रद्धा का वातावरण देखने को मिला। नगर के प्रमुख मार्गों पर श्रद्धालु सुबह से ही एकत्रित हो गए थे तथा जगह-जगह स्वागत की व्यवस्थाएं की गई थीं। मुनि श्री मनासा से ससंघ विहार करते हुए नारायणगढ़ पहुंचे। प्रातःकाल विश्राम गृह से भव्य मंगल प्रवेश यात्रा प्रारंभ हुई, जिसमें बड़ी संख्या में महिला, पुरुष एवं युवा श्रद्धालु शामिल हुए। यात्रा बस स्टैंड सहित नगर के प्रमुख मार्गों से होकर दिगम्बर जैन मांगलिक भवन पहुंची। पूरे मार्ग में श्रद्धालु भक्ति एवं श्रद्धा के साथ मुनि श्री के दर्शन कर धर्मलाभ प्राप्त करते रहे। दिगम्बर जैन मांगलिक भवन में आयोजित धर्मसभा में मुनिश्री प्रणम्य सागर महाराज ने अपने प्रेरणादायी एवं ओजस्वी प्रवचन में धर्म, अध्यात्म, करुणा और आत्मकल्याण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि नारायणगढ़ का नाम स्वयं नारायण से जुड़ा हुआ है और इस नगर में सकारात्मक ऊर्जा का विशेष अनुभव होता है। यहां की धार्मिक भावना एवं श्रद्धा लोगों के जीवन में आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करती है। मुनि ने अपने प्रवचन में कहा कि वर्तमान समय में मनुष्य को सभी धर्मों का सम्मान करना चाहिए। धर्म का वास्तविक स्वरूप किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं, बल्कि प्रेम, दया, सहिष्णुता और सद्भावना है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को प्राणी मात्र के प्रति दया भाव रखना चाहिए, क्योंकि जीवों के प्रति करुणा ही सच्चे धर्म की पहचान है। यदि मनुष्य अपने जीवन में दया, क्षमा और अहिंसा के सिद्धांतों को अपनाता है तो वह आत्मिक शांति एवं आनंद प्राप्त कर सकता है। उन्होंने कहा कि मानव जीवन अत्यंत दुर्लभ है और इसका उद्देश्य केवल भौतिक सुख-सुविधाओं की प्राप्ति नहीं, बल्कि आत्मा के कल्याण का मार्ग खोजकर मोक्ष की ओर अग्रसर होना है। मोक्ष मार्ग को अंगीकार कर ही मनुष्य जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो सकता है। इसके लिए संयम, तप, साधना और आत्मचिंतन को जीवन का हिस्सा बनाना आवश्यक है। मुनि श्री ने समाजजनों से धार्मिक संस्कारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का आह्वान करते हुए कहा कि परिवार और समाज में नैतिक मूल्यों की स्थापना से ही एक स्वस्थ एवं संस्कारित समाज का निर्माण संभव है। उन्होंने युवाओं को धर्म, संस्कृति एवं भारतीय परंपराओं से जुड़े रहने की प्रेरणा भी दी। कार्यक्रम में दिल्ली, रतलाम, मंदसौर, नीमच सहित विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं समाजजन पहुंचे। उल्लेखनीय है कि मुनि श्री प्रणम्यसागर महाराज लगभग एक दशक बाद नारायणगढ़ पधारे। उनके पुनः आगमन से जैन समाज सहित समूचे क्षेत्र में हर्ष और उत्साह का माहौल देखा गया।श्रद्धालुओं ने इसे अपने लिए सौभाग्य का अवसर बताते हुए बड़ी संख्या में धर्मसभा में सहभागिता की। कार्यक्रम का संचालन अशोक जैन ने किया। अंत में श्रद्धालुओं ने मुनि श्री के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। अशौक जैन ने बताया मुनिश्री का आगामी विहार पिपलिया क्षेत्र में प्रवास के पश्चात बही पार्श्वनाथ की ओर प्रस्तावित है। कार्यक्रम में क्षेत्र के गणमान्य नागरिक, समाजजन, महिला मंडल, युवा मंडल एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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