*भगवान बिरसा मुंडा के आदर्शों पर चलकर हक, अधिकार और संविधान की रक्षा के लिए संघर्ष करना होगा - जोकचंद*
जन जागृति संगम न्यूज
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पिपलिया स्टेशन (निप्र)। महान जननायक, आदिवासी समाज के गौरव एवं स्वतंत्रता संग्राम के अमर सेनानी भगवान बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि मोगिया गोंड समाज के तत्वावधान में श्रद्धा, सम्मान एवं गरिमामय वातावरण में मनाई गई। कार्यक्रम का आयोजन समाज के प्रदेश उपाध्यक्ष भगतराम डाबी के नेतृत्व में किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में समाजजन, जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान बिरसा मुंडा के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। उपस्थित अतिथियों एवं समाजजनों ने पुष्पांजलि अर्पित कर महान जननायक को श्रद्धासुमन अर्पित किए तथा उनके संघर्षमय जीवन और राष्ट्र के प्रति योगदान को स्मरण किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मल्हारगढ़ विधानसभा क्षेत्र से पूर्व प्रत्याशी एवं किसान नेता श्यामलाल जोकचंद ने अपने संबोधन में कहा कि भगवान बिरसा मुंडा ने मात्र 25 वर्ष की अल्पायु में जन, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए ऐतिहासिक आंदोलन खड़ा कर आदिवासी समाज को नई दिशा प्रदान की थी। सीमित संसाधनों और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने आदिवासी समाज को संगठित कर अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष का बिगुल फूंका। उनका जीवन त्याग, साहस, संगठन और संघर्ष की अद्भुत मिसाल है। जोकचंद ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिन महापुरुषों ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया, आज उनके वंशज अनेक क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं, शिक्षा और विकास से वंचित हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में संविधान, लोकतंत्र, सामाजिक न्याय तथा प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए समाज को पुनः संगठित होकर संघर्ष करने की आवश्यकता है। उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि शिक्षा सामाजिक परिवर्तन का सबसे सशक्त माध्यम है। समाज के बच्चों और युवाओं को शिक्षित, संगठित एवं संघर्षशील बनना होगा। जब तक युवा वर्ग जागरूक होकर अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति सजग नहीं होगा, तब तक महापुरुषों के सपनों का भारत साकार नहीं हो सकेगा। उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा, बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर, महात्मा गांधी, भगवान गौतम बुद्ध, टंट्या भील, शहीद भगत सिंह और नेताजी सुभाषचंद्र बोस जैसे महान विभूतियों के विचार आज भी समाज को नई दिशा और प्रेरणा प्रदान करते हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे मोगिया गोंड समाज के प्रदेश उपाध्यक्ष भगतराम डाबी ने कहा कि समाज को अपने हक और अधिकारों के प्रति जागरूक होना होगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा और कलम की ताकत को पहचानने की आवश्यकता है। शिक्षित एवं संगठित समाज ही अपने अधिकारों की रक्षा कर सकता है तथा विकास की मुख्यधारा में आगे बढ़ सकता है। इस अवसर पर विष्णुप्रसाद दुबे, दिनेश पाटीदार, मनोहर सोनी, मदनलाल वर्मा, दिनेश कारपेंटर, अशोक आर्य, पार्षद बाबू मंसूरी, गोपाल पाटीदार, धर्मेंद्र धनगर, लालसिंह सोकड़ी, डॉ. कन्हैयालाल चंदवासा, राजेंद्र भाटी, सूरजमल, रामनिवास, अशोक चौहान, मनोहरलाल, श्यामलाल, शिवलाल, शंकरलाल, गणपत, सुनील, ओमप्रकाश, धर्मेंद्र, प्रेमचंद, मनोहर भाटी, अनिल फौजी सहित अन्य वक्ताओं ने भी भगवान बिरसा मुंडा के जीवन, संघर्ष और समाज सुधार के कार्यों पर प्रकाश डालते हुए उनके आदर्शों को आत्मसात करने का आह्वान किया। संचालन कुंजीलाल पाटीदार ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन राजेंद्र भाटी ने माना। अंत में उपस्थित सभी समाजजनों ने भगवान बिरसा मुंडा के बताए मार्ग पर चलने, शिक्षा को बढ़ावा देने, सामाजिक एकता को मजबूत करने तथा समाज में जागरूकता का प्रसार करने का संकल्प लिया।
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