*#SBM_घोटाला - सचिव ने बदले बयान, गरीब महिला को 2 साल से शौचालय की राशि से रखा वंचित, #CM_हेल्पलाइन को भी दिया धोखा* *पहली रिपोर्ट में कहा 'शौचालय नहीं बना', दूसरी में लिखा 'पहले से बना है' - विरोधाभासी रिपोर्ट देकर बंद कराई शिकायत, CEO जिला पंचायत से निलंबन व FIR की मांग*
जन जागृति संगम न्यूज
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#मनासा, #नीमच।#स्वच्छ_भारत_मिशन जैसी प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना को #ग्राम_पंचायत_दुधलाई के सचिव ने भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दिया। एक गरीब महिला हितग्राही को 2 साल से शौचालय प्रोत्साहन राशि से वंचित रखने के लिए सचिव ने CM हेल्पलाइन 181 को भी झूठे व विरोधाभासी प्रतिवेदन देकर गुमराह किया। पीड़िता गुड्डी बाई ने अब CEO जिला पंचायत नीमच से सचिव के निलंबन और FIR की मांग की है।
क्या है पूरा मामला:-
ग्राम दुधलाई निवासी गुड्डी बाई पति अमृतराम धनगर ने 18/03/2024 को SBM पोर्टल पर आवेदन क्रमांक 2251809062 से शौचालय हेतु आवेदन किया था। लाभ न मिलने पर 01/02/2025 को CM हेल्पलाइन 181 पर शिकायत क्रमांक 30790000 दर्ज कराई।
सचिव का पहला झूठ:-
जाँच में सचिव ने रिपोर्ट दी कि "गुड्डीबाई का नाम पोर्टल पर स्वीकृत है। आवेदक द्वारा शौचालय निर्माण नहीं किया गया है। निर्माण पूर्ण होने पर ही राशि मिलेगी।" इस आधार पर शिकायत बंद हो गई।
सचिव के इसी निर्देश पर गुड्डी बाई ने कर्ज लेकर स्वयं के खर्च से शौचालय बनवा लिया। लेकिन जब वह 12,000 रुपये प्रोत्साहन राशि लेने पंचायत गई तो सचिव ने कई बार टाल-मटोल कर चक्कर कटवाए और राशि देने से इनकार कर दिया।
सचिव का दूसरा झूठ:-
परेशान होकर गुड्डी बाई ने 16/02/2026 को फिर CM हेल्पलाइन पर शिकायत की। इस बार सचिव ने L-2 अधिकारी को भेजी रिपोर्ट में पलटी मार दी। नई रिपोर्ट में लिखा कि "शिकायतकर्ता के यहां पूर्व से शौचालय बना हुआ है। SBM फेस-II में नाम नहीं जोड़ा जा सकता। पात्रता नहीं रखता।
सबसे बड़ा सवाल: जब पहली रिपोर्ट में सचिव खुद कह रहा था कि 'शौचालय बना नहीं है', तो दूसरी रिपोर्ट में 'पहले से बना हुआ है' कैसे हो गया? दोनों रिपोर्ट एक-दूसरे की पोल खोल रही हैं। साफ है कि सचिव ने जानबूझकर अवैध वसूली की मंशा से एक गरीब महिला को योजना से वंचित रखने के लिए मिथ्या दस्तावेज बनाए।
BNS की धाराओं में फंसा सचिव:-
पीड़िता ने CEO जिला पंचायत को दी शिकायत में सचिव पर भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 198, 201, 236, 318, 61 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत FIR की मांग की है। आरोप है कि सचिव ने पद का दुरुपयोग, मिथ्या दस्तावेज तैयार करना, धोखाधड़ी व आपराधिक षड्यंत्र किया।
मुख्य मांगें:
1. सचिव को तत्काल निलंबित कर विभागीय जाँच शुरू हो।
2. FIR दर्ज कर आपराधिक कार्रवाई हो।
3. 12,000 रुपये राशि ब्याज सहित तुरंत जारी हो।
4. मानसिक प्रताड़ना के लिए सचिव के वेतन से 10,000 रुपये क्षतिपूर्ति दिलाई जाए।
प्रशासन पर उठे सवाल:-
L-2 अधिकारी श्री अमन वैष्णव, प्रभारी CEO जिला पंचायत द्वारा बिना सत्यापन के सचिव की झूठी रिपोर्ट पर शिकायत बंद करना भी सवालों के घेरे में है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि उच्च अधिकारी ही ऐसे फर्जी प्रतिवेदनों पर मुहर लगाते रहेंगे तो गरीबों को न्याय कैसे मिलेगा?
CEO जिला पंचायत नीमच को शिकायत की प्रतिलिपि कलेक्टर नीमच, आयुक्त पंचायती राज भोपाल एवं प्रमुख सचिव पंचायत विभाग को भी भेजी गई है। अब देखना है कि प्रशासन इस "कागजी घोटाले" पर क्या कार्रवाई करता है।💥💥💥💥💥 जनहित में जारी💥💥 ज्ञानेश प्रजापति

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