*थाने से महज 2 किमी दूर चल रही थी डोडाचूरा पीसने की फैक्ट्री, सीबीएन ने करीब 10 क्विंटल डोडाचूरा किया जब्त, आरोपी के ढाबे से भी तस्करी का कनेक्शन खंगाल रही एजेंसी, मल्हारगढ़ पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल*
जन जागृति संगम न्यूज
(जेपी तेलकार, 9303273037)
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पिपलिया स्टेशन (जेपी तेलकार)। मादक पदार्थों की तस्करी के लिए बदनाम हो चुके मल्हारगढ़ क्षेत्र में सोमवार को केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए थाना मुख्यालय से महज दो किलोमीटर दूर स्थित ग्राम आकली में अवैध रूप से संचालित डोडाचूरा पीसने की फैक्ट्री का भंडाफोड़ कर दिया। कार्रवाई के दौरान टीम ने करीब 10 क्विंटल डोडाचूरा, डोडाचूरा पीसने की मशीन तथा अन्य सामग्री जब्त कर आरोपी को हिरासत में लिया है। इस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर खड़ा हो गया है। जिस स्थान पर लंबे समय से बड़े पैमाने पर डोडाचूरा पीसने का कारोबार चल रहा था, वह मल्हारगढ़ थाने से महज दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसके बावजूद स्थानीय पुलिस को इसकी जानकारी क्यों नहीं लगी, या यदि जानकारी थी तो कार्रवाई क्यों नहीं की गई? यह चर्चा पूरे क्षेत्र में बनी हुई है। हालांकि समाचार लिखे जाने तक केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो की ओर से इस कार्रवाई को लेकर कोई आधिकारिक प्रेस नोट जारी नहीं किया गया था।
*सुबह छह बजे गांव पहुंची सीबीएन की टीम:*-
जानकारी के अनुसार सोमवार सुबह करीब छह बजे केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो की टीम दो बोलेरो वाहनों में सवार होकर ग्राम आकली पहुंची। टीम में करीब एक दर्जन अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल थे। अधिकारियों ने युवराज सिंह के मकान पर एक साथ दबिश दी। करीब दो घंटे तक चली कार्रवाई में घर के भीतर से बड़ी मात्रा में डोडाचूरा, उसे पीसने की मशीन तथा अन्य सामग्री बरामद की गई। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपी ने अपने घर के अंदर ही डोडाचूरा पीसने की मशीन स्थापित कर रखी थी, जहां बड़ी मात्रा में डोडाचूरा पीसकर तैयार किया जाता था। कार्रवाई के दौरान बरामद सामग्री को जब्त कर आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी गई है।
*अफीम का पट्टा नहीं, फिर कहां से आ रहा था माल* ?:-
सूत्रों के अनुसार आरोपी युवराज सिंह के नाम पर अफीम खेती का कोई वैध पट्टा नहीं है। इसके बावजूद उसके पास भारी मात्रा में डोडाचूरा मिला है। जांच के दौरान यह जानकारी भी सामने आई है कि राजेन्द्र नामक व्यक्ति उसे डोडाचूरा उपलब्ध कराता था। अब जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में लगी हुई हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि मादक पदार्थ कहां से आता था और किन-किन लोगों तक पहुंचाया जाता था।
*हाईवे पर ढाबा भी संचालित करता है आरोपी*:-
सूत्रों के अनुसार आरोपी का महू-नीमच फोरलेन पर एक ढाबा भी संचालित है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि डोडाचूरा की सप्लाई इस ढाबे के माध्यम से भी की जाती रही होगी। फिलहाल एजेंसी इस एंगल पर भी जांच कर रही है कि कहीं ढाबा मादक पदार्थों की सप्लाई का माध्यम तो नहीं बना हुआ था।
*एक बार फिर कटघरे में स्थानीय पुलिस*:-
सीबीएन की कार्रवाई के बाद सबसे अधिक सवाल स्थानीय पुलिस की भूमिका को लेकर उठ रहे हैं। जिस स्थान पर अवैध फैक्ट्री संचालित हो रही थी, वह थाना मुख्यालय से मात्र दो किलोमीटर दूर स्थित है। ऐसे में लोगों का कहना है कि यदि केंद्रीय एजेंसी को सूचना मिल सकती है तो स्थानीय पुलिस तक यह जानकारी क्यों नहीं पहुंची? क्षेत्रवासियों का कहना है कि इतनी बड़ी मात्रा में डोडाचूरा का भंडारण, पीसाई और सप्लाई एक-दो दिन का काम नहीं हो सकता। ऐसे में यह गतिविधि लंबे समय से संचालित हो रही होगी। इसके बावजूद पुलिस की ओर से कोई कार्रवाई नहीं होना कई सवाल खड़े करता है।
*पहले भी सीबीएन कर चुकी है कार्रवाई*:-
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले जिले की कचनारा चौकी क्षेत्र में भी केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो ने मादक पदार्थों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की थी। उस मामले में जिला पुलिस अधीक्षक द्वारा संबंधित जिम्मेदार पुलिस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए लाइन अटैच किया गया था। अब आकली में हुई कार्रवाई के बाद लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस मामले में भी जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कोई विभागीय कार्रवाई होगी।
*महू-नीमच फोरलेन के ढाबे पहले भी रहे हैं जांच एजेंसियों के निशाने पर:*-
महू-नीमच फोरलेन लंबे समय से मादक पदार्थों की तस्करी को लेकर चर्चा में रहा है। जानकारी के अनुसार पिपलिया से आगे मल्हारगढ़ व नीमच के बीच 30 किलोमीटर लंबे हिस्से में कई ढाबों पर पंजाबी भाषा के बोर्ड, सिद्धू मूसेवाला के पोस्टर और कनाडा के झंडे लगे हुए हैं, जबकि यह ढ़ाबे क्षेत्र के लोग ही संचालित कर रहे है। कुछ ढाबों का उपयोग पहले से चिन्हित ट्रक चालकों को अफीम एवं डोडाचूरा उपलब्ध कराने के लिए किया जाता रहा है। इन ढाबों पर बाहरी व्यक्तियों को आसानी से मादक पदार्थ नहीं दिए जाते, बल्कि पहले से तय ग्राहकों के नाम और मोबाइल नंबर दर्ज रहते हैं। कई मामलों में पहचान नहीं होने पर लोगों को पानी तक देने से इंकार कर दिया जाता है।
*कई ढाबों पर पहले भी हुई कार्रवाई*:-
पिछले कुछ वर्षों में महू-नीमच फोरलेन पर स्थित कई ढाबों पर पुलिस एवं नारकोटिक्स एजेंसियों ने कार्रवाई करते हुए बड़ी मात्रा में डोडाचूरा और अफीम जब्त की है। वर्ष 2022-23 में रतलाम-जावरा क्षेत्र में तस्करी के अड्डे बने 37 ढाबों को प्रशासन द्वारा ध्वस्त भी किया गया था। इसके अलावा सूठोद, बावल, सिमलावदा फंटा तथा जीरन क्षेत्र में भी कई बार कार्रवाई हो चुकी है।
*क्या आकली की कार्रवाई उसी नेटवर्क का हिस्सा*?:-
आकली में पकड़ी गई फैक्ट्री और आरोपी के मल्हारगढ़ क्षेत्र में सूठोद के निकट हाईवे पर स्थित ढाबा संचालक होने की जानकारी सामने आने के बाद यह संभावना भी जताई जा रही है कि यह पूरा मामला महू-नीमच फोरलेन पर सक्रिय तस्करी नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है। हालांकि इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
*बड़े सवाल*:-
थाने से महज दो किलोमीटर दूर अवैध फैक्ट्री कैसे संचालित होती रही?
स्थानीय पुलिस को इसकी जानकारी क्यों नहीं लगी? यदि जानकारी थी तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
क्या हाईवे के कुछ ढाबे अब भी मादक पदार्थों की तस्करी के नेटवर्क का हिस्सा हैं?
क्या इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी?
इन सवालों के जवाब अब केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो की जांच और पुलिस प्रशासन की आगामी कार्रवाई से ही सामने आएंगे।
*अधिकारियों ने नहीं उठाया फोन*:-
मामले में पक्ष जानने के लिए मल्हारगढ़ एसडीओपी पिंटू बघेल से मोबाइल नं. 9691127911 एवं थाना प्रभारी अनिल रघुवंशी से मोबाइल नं. 9009001964 पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक दोनों अधिकारियों ने कॉल रिसीव नहीं की।
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