*गृहिणी के पारिवारिक दायित्व का मूल्यांकन आवश्यक।* *बीमा कंपनी को सड़क दुर्घटना में सम्पतबाई प्रजापति निवासी - हतुनिया की मृत्यु पर परिवार को 31.32 लाख मुआवजा देने का आदेश।*
जन जागृति संगम न्यूज
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गरोठ / मंदसौर,। न्यायालय द्वितीय अतिरिक्त सदस्य, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) गरोठ (न्यायाधीश श्री पुंजिया बारिया) ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि “गृहिणी राष्ट्र की निर्माता है और परिवार व समाज के निर्माण में उसका योगदान अमूल्य होता है। उसके कार्यों का आर्थिक मूल्यांकन करना न्यायसंगत एवं आवश्यक है।”* न्यायालय ने हाल के उच्चतम न्यायालय के निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि घरेलू कार्यों को केवल पारिवारिक दायित्व मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
*यह आदेश ग्राम हतुनिया, तहसील गरोठ, जिला मंदसौर निवासी श्री रमेशचन्द्र प्रजापति, उनकी पुत्री संतोषबाई, पुत्र परमेश्वर एवं नाबालिग पुत्र जसवंत द्वारा अपने अधिवक्ता पंकज वेद, मंदसौर के माध्यम से प्रस्तुत क्लेम में अवार्ड पारित किया गया।*
प्रकरण के अनुसार 02 अप्रैल 2025 को लगभग सुबह 9 बजे श्रीमती सम्पतबाई प्रजापति (उम्र लगभग 55 वर्ष) अपने परिवार के लिए भोजन लेकर खेत की ओर पैदल जा रही थीं। उसी दौरान कुलदेव बस क्रमांक MP-14-TB-0528 के चालक ने वाहन को तेज गति एवं लापरवाहीपूर्वक चलाते हुए उन्हें पीछे से टक्कर मार दी। गंभीर चोट लगने पर उन्हें उपचार के लिए मंदसौर ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।न्यायालय ने साक्ष्यों के आधार पर दुर्घटना को चालक की लापरवाही का परिणाम मानते हुए दावाकर्ताओं के पक्ष में ₹31,32,000/- (इकतीस लाख बत्तीस हजार रुपये) का क्लेम मंजूर करते हुए उक्त राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित प्रदान करने का आदेश दिया।
बीमा कंपनी द्वारा वाहन के परमिट, फिटनेस एवं बीमा शर्तों के उल्लंघन संबंधी आपत्तियां उठाई गई थीं, लेकिन अधिकरण ने अभिलेखों के आधार पर उन्हें स्वीकार नहीं किया और माना कि दुर्घटना के समय वाहन वैध रूप से बीमित था तथा चालक के पास प्रभावी ड्राइविंग लाइसेंस उपलब्ध था।
निर्णय में न्यायालय ने यह भी कहा कि एक गृहिणी केवल भोजन बनाने तक सीमित नहीं होती, बल्कि बच्चों के पालन-पोषण, परिवार के स्वास्थ्य, शिक्षा, देखभाल तथा घरेलू व्यवस्था के संचालन में उसकी केंद्रीय भूमिका होती है। ऐसे योगदान का उचित आर्थिक मूल्यांकन कर प्रतिकर निर्धारित किया जाना चाहिए।
*दावाकर्ताओं की ओर से प्रकरण की पैरवी अधिवक्ता पंकज कुमार वेद, मंदसौर द्वारा की गई।* यह निर्णय गृहिणियों के श्रम और योगदान को न्यायिक मान्यता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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