*पशुपालकों की बदहाल स्थिति पर सरकार तत्काल ठोस कदम उठाए – किसान नेता श्यामलाल जोकचंद*
जन जागृति संगम न्यूज
जेपी तेलकार
पिपलिया स्टेशन (निप्र)। किसान नेता श्यामलाल जोकचंद ने प्रदेश और देश के पशुपालकों की लगातार बिगड़ती आर्थिक स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए सरकार से तत्काल ठोस राहत पैकेज और प्रभावी नीतिगत निर्णय लेने की मांग की है। उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर कहा कि बढ़ती लागत, पशु आहार की महंगाई, दूध के कम दाम, महंगा इलाज और सरकारी उपेक्षा के कारण पशुपालक वर्ग अभूतपूर्व संकट से गुजर रहा है। यदि समय रहते सरकार ने संवेदनशील और ठोस कदम नहीं उठाए, तो पशुपालन का पारंपरिक व्यवसाय गहरे संकट में पहुंच जाएगा, जिसका सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। जोकचंद ने कहा कि सूखा भूसा, हरा चारा, पशु आहार (बाटा), खली, चूरी सहित अन्य आवश्यक सामग्री के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, जबकि दूध का मूल्य उत्पादन लागत के अनुरूप नहीं बढ़ा है। इससे पशुपालकों को प्रतिदिन आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की कि प्रत्येक पंजीकृत पशुपालक को प्रति पशु प्रतिमाह 60 किलोग्राम पशु आहार मात्र 3 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से उपलब्ध कराया जाए। साथ ही हरे एवं सूखे चारे की पर्याप्त व्यवस्था की जाए तथा पशुओं के लिए 100 प्रतिशत अनुदान पर आधुनिक एवं सुरक्षित शेड निर्माण योजना लागू की जाए। उन्होंने कहा कि पशुओं के उपचार का खर्च सामान्य पशुपालकों की क्षमता से बाहर होता जा रहा है। शासकीय पशु चिकित्सालयों में पर्याप्त चिकित्सकों की नियुक्ति, आधुनिक उपकरणों और आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए पशुओं का संपूर्ण उपचार निःशुल्क किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि स्वस्थ पशु ही समृद्ध पशुपालक और मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था की आधारशिला हैं। किसान नेता ने निजी बैंक और वित्तीय कंपनियों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि ऊंची ब्याज दरों पर छोटे-छोटे ऋण देकर किसानों और पशुपालकों को कर्ज के जाल में फंसाया जा रहा है। मामूली चूक पर उनकी सिबिल (CIBIL) खराब कर दी जाती है, जिससे वे भविष्य में राष्ट्रीयकृत बैंकों से भी ऋण लेने से वंचित हो जाते हैं। उन्होंने सरकार से बिना सिबिल की बाध्यता, सरल प्रक्रिया, न्यूनतम ब्याज दर और आसान मासिक किस्तों पर विशेष पशुपालन ऋण योजना लागू करने की मांग की। जोकचंद ने कहा कि पशुओं की खरीदी-बिक्री और परिवहन के दौरान वैध व्यापार करने वाले पशुपालकों को कई स्थानों पर अवैध वसूली, अनावश्यक रोक-टोक, गुंडागर्दी और मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। उन्होंने ऐसी अराजक प्रवृत्तियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई कर पशुपालकों को भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने बाजार में नकली दूध, नकली घी, नकली पनीर, नकली मक्खन और अन्य मिलावटी दुग्ध उत्पादों के बढ़ते कारोबार पर भी चिंता व्यक्त की। उनका कहना है कि यह न केवल उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है, बल्कि ईमानदार पशुपालकों और डेयरी उत्पादकों के हितों पर भी सीधा प्रहार है। उन्होंने प्रदेशव्यापी विशेष अभियान चलाकर मिलावटखोरों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने तथा खाद्य सुरक्षा कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने की मांग की। अंत में श्यामलाल जोकचंद ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के अपने संकल्प के प्रति गंभीर है, तो पशुपालकों की समस्याओं का समाधान केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि ठोस नीतिगत निर्णयों और समयबद्ध क्रियान्वयन से करना होगा। उन्होंने सरकार से पशुपालकों के लिए व्यापक राहत पैकेज घोषित कर पशुपालन क्षेत्र को आर्थिक संबल प्रदान करने की मांग करते हुए कहा कि यही ग्रामीण समृद्धि, दुग्ध क्रांति और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में सार्थक कदम साबित होगा।
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