सरपंच जनप्रतिनिधि के बच्चे भी नहीं पढ़ रहे शासकीय विद्यालय में💥सर्व शिक्षा अभियान की उड़ गई धज्जियां
जन जागृति संगम न्यूज
9302003334
मल्हारगढ़ जनपद में स्कूलों मे सिर्फ शिक्षक रह गए बच्चे ऱह गए नाममात्र शिक्षक सिर्फ अपना उल्लू सीधा करने मे अव्वल महीना पूरा हो और मिले वेतन।
क्या है पूरा मामला शिक्षा विकास खंड मल्हारगढ़ के अंतर्गत आने वाले प्राथमिक विद्यालय एवं माध्यमिक विद्यालयों में25% बच्चे भी नहीं रहे। इन विद्यालयों में शिक्षकों की कार्यप्रणाली पर उठने लगे हैं सवाल एक प्राथमिक विद्यालय कचरिया देव में दो बच्चे। और दोनों को पढ़ने के लिए दो टीचर और इनका प्रति माह का वेतन भुगतान 90हजार, माध्यमिक विद्यालय बरखेड़ा पंथ में 17 बच्चे और 5 टीचर इसी प्रकार माध्यमिक विद्यालय खकराई मैं 17 बच्चे और पढ़ने वाले शिक्षक 5, शासकीय माध्यमिक विद्यालय बरूजना मैं बच्चों की संख्या बहुत ही कम शायद 10 या 12 और शिक्षकों की भरमार। आखिर इन विद्यालय में बच्चों की संख्या कम क्यों हुई क्या शिक्षकों के द्वारा विद्यालय खुलने से पहले गांव में घर घर जाकर बच्चों के माता-पिता से बच्चों को पढ़ने के लिए विद्यालय में भेजने का आग्रह नहीं किया गया आखिर क्यों इन विद्यालयों के आसपास क्षेत्र में प्राइवेट विद्यालय संचालित हो रहे हैं उन विद्यालयों में बच्चे कहां से आए जो यह विद्यालय में बच्चों की संख्या कम है इन्हीं विद्यालयों की शिक्षकों की ठंडी कार्यशैली के चलते बच्चे यहां से निकलकर प्राइवेट विद्यालयों में अध्ययन कर रहे हैं क्या इन विद्यालयों को शासकीय अन्य विद्यालयों में मर्ज कर देना चाहिए या नहीं क्यों ऐसे शिक्षक सरकारी खजाने को चूना लगाकर अपना वेतन भुगतान करवा रहे हैं। ऐसे विद्यालय ओके तीन से चार साल के रिकॉर्ड जिला शिक्षा अधिकारी एवं कलेक्टर के द्वारा सत्यापित करवाए जावे कि जिन विद्यालयों में पिछले गत वर्षो में कितने बच्चे थे और आज कितने हैं अगर इसमें वर्तमान शिक्षकों की कार्य प्रणाली ठंडी और सुस्त नजर आती है तो इन शिक्षकों की सेवा समाप्त कर दी जाना चाहिए। क्योंकि ऐसे ही नकारा शिक्षकों की वजह से प्राइवेट विद्यालय बड़े जोर शोर से संचालित हो रहे हैं। उन प्राइवेट विद्यालयों का कोई मापदंड नहीं है फिर भी जोर शोर से चल रहे हैं। जिन विद्यालयों में 25% बच्चों से कम है उन विद्यालयों को अन्य विद्यालयों में मर्ज किया जावे एवं उन विद्यालय की शिक्षकों की सेवा समाप्त की जावे जो सिर्फ विद्यालय जाते हैं टाइम पास करने के लिए और अपना महीना पूरा होते ही वेतन भुगतान ले लेते हैंl वर्तमान में ग्राम पंचायत सरपंच जन प्रतिनिधि उनके खुद के बच्चे भी प्राइवेट विद्यालयों में अध्ययन कर रहे हैं जब जनप्रतिनिधि ही शासकीय विद्यालय में अपने बच्चों को नहीं पढ़ाएंगे तो अन्य व्यक्ति क्यों पढ़ाए क्यों ना हो इन सरपंच जनप्रतिनिधियों का कार्यकाल भी शून्य घोषित किया जाए जिनके खुद के बच्चे प्राइवेट विद्यालयों में अध्ययन करते हो और खुद 15 अगस्त और 26 जनवरी पर सरकारी स्कूल में झंडा वंदन करते हो।
जनहित मे जारी ज्ञानेश प्रजापति

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें