*बरसात में टपक रहे मंडी के किसान शेड, तिरपाल से लहसुन बचाने को मजबूर किसान, करोड़ों की मंडी व्यवस्था पर उठे सवाल, बारिश ने खोली तैयारियों की पोल, 30 वर्ष पुराने शेड बदलने की तैयारी में प्रशासन

जन जागृति संगम न्यूज
जेपी तेलकार


पिपलिया स्टेशन (जेपी तेलकार)। कृषि उपज मंडी पिपलिया में किसानों की सुविधा के लिए बनाए गए किसान शेड अब स्वयं किसानों के लिए परेशानी का कारण बनते जा रहे हैं। सावन माह की पहली बारिश ने मंडी प्रशासन की व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति उजागर कर दी। बुधवार देर रात हुई बारिश के दौरान मंडी परिसर में बने कई किसान शेडों की छतों से लगातार पानी टपकता रहा। इसके कारण शेड के नीचे रखी किसानों की लहसुन सहित अन्य कृषि उपज भीगने लगी। अपनी मेहनत की उपज को खराब होने से बचाने के लिए किसानों को रातभर महंगे तिरपाल से ढंककर निगरानी करनी पड़ी। बारिश के दौरान मंडी परिसर में कई स्थानों पर पानी सीधे उपज पर गिरता रहा। जिन किसानों ने शेडों के नीचे अपनी लहसुन रखी थी, उन्हें अचानक उपज को इधर-उधर करना पड़ा, जबकि कई किसानों ने तत्काल तिरपाल की व्यवस्था कर किसी तरह फसल को भीगने से बचाया। किसानों का कहना है कि यदि समय पर तिरपाल नहीं डाली जाती तो बड़ी मात्रा में लहसुन खराब हो सकती थी, जिससे उन्हें हजारों रुपये का नुकसान उठाना पड़ता। कृषि मंडी के पूर्व अध्यक्ष बंशीलाल पाटीदार व उपाध्यक्ष कमलेश पटेल ने बताया कि मंडी में उपज लाने के बाद किसानों को यह भरोसा रहता है कि शेडों के नीचे उनकी फसल सुरक्षित रहेगी, लेकिन बारिश के समय यही शेड सुरक्षा देने के बजाय परेशानी का कारण बन रहे हैं। किसानों का कहना है कि जब बारिश से बचाने के लिए बनाए गए शेड ही पानी टपकाने लगें, तो उनके निर्माण का उद्देश्य ही समाप्त हो जाता है। करोड़ों रुपये की लागत से विकसित मंडी की व्यवस्थाएं यदि किसानों की उपज को सुरक्षित नहीं रख पा रही हैं, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। किसानों के अनुसार लहसुन जैसी नगदी फसल बारिश में भीग जाने पर उसकी गुणवत्ता प्रभावित होती है। नमी आने से उपज का रंग और गुणवत्ता बदल जाती है, जिसके कारण मंडी में अच्छे भाव नहीं मिलते। कई बार व्यापारी भी ऐसी उपज खरीदने में रुचि नहीं दिखाते या कम कीमत लगाते हैं। ऐसे में किसानों को सीधे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। पहले से ही खेती की बढ़ती लागत, मौसम की अनिश्चितता और बाजार के उतार-चढ़ाव से जूझ रहे किसानों के लिए यह अतिरिक्त परेशानी बन गई है। बारिश के बाद किसानों में मंडी प्रशासन की व्यवस्थाओं को लेकर नाराजगी भी देखने को मिली। किसानों ने मांग की कि पुराने और जर्जर हो चुके शेडों की तत्काल मरम्मत कराई जाए तथा जहां आवश्यकता हो वहां नए शेड बनाए जाएं। उनका कहना है कि प्रत्येक वर्ष बरसात के मौसम में यही स्थिति बनती है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं किया जाता। यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो आगामी बारिश में किसानों को और अधिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। किसानों का कहना है कि शासन किसानों की सुविधा के लिए मंडियों में करोड़ों रुपये खर्च करता है, लेकिन यदि मूलभूत सुविधाएं ही समय पर काम नहीं आएं तो इन व्यवस्थाओं का लाभ किसानों तक नहीं पहुंच पाता। उन्होंने मांग की कि मंडी प्रशासन शेडों की गुणवत्ता की जांच कराते हुए आवश्यक मरम्मत और नवीन निर्माण कार्य शीघ्र शुरू कराए, ताकि भविष्य में किसी भी किसान की उपज बारिश के कारण खराब न हो।
30 वर्ष पुराने हैं शेड, शीघ्र *बदली जाएंगी चद्दरें:- मंडी सचिव*
कृषि उपज मंडी सचिव जगदीशचंद भामर ने बताया कि मंडी परिसर में बने अधिकांश किसान शेड लगभग 30 वर्ष पुराने हैं। समय-समय पर उनकी मरम्मत कराई जाती रही है। जहां पानी टपकने की शिकायत मिलती है, वहां किसानों को उपज के ढेर नहीं लगाने की सलाह दी जाती है। उन्होंने बताया कि पुराने शेडों को बदलने के लिए आवश्यक प्रक्रिया (प्रोसिडिंग) तैयार कर ली गई है। जल्द ही शेडों की पुरानी चद्दरों को बदलकर समस्या का स्थायी समाधान किया जाएगा। मंडी प्रशासन किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए लगातार प्रयासरत है और आवश्यक सुधार कार्य प्राथमिकता से कराए जाएंगे।
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