*गरोठ न्यायालय का शानदार फैसला सड़क दुर्घटना मे मृतक के आश्रितों को ₹41.04 लाख एवं दावा प्रस्तुति दिनांक से 7% वार्षिक ब्याज देने का आदेश।**मर्ग जांच के दौरान विलंब से प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज होना दावे के लिए घातक नहीं, बीमा कंपनी मुआवजा देने के दायित्व से नहीं बच सकती*
जन जागृति संगम न्यूज
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गरोठ / मंदसौर,
माननीय न्यायालय मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT), गरोठ के प्रथम सदस्य/ न्यायाधीश - *श्री निरंजन कुमार पांचाल सा.* ने लगभग 10 माह में एक महत्वपूर्ण निर्णय पारित करते हुए सड़क दुर्घटना में मृत युवक शादाब अली के आश्रित परिवार को *₹41,04,000 (इकतालीस लाख चार हजार रुपये)* की क्षतिपूर्ति व दावा प्रस्तुति दिनांक से 7% वार्षिक ब्याज सहित अदा करने का आदेश दिया।
माननीय न्यायालय ने अपने निर्णय में यह महत्वपूर्ण सिद्धांत प्रतिपादित किया कि
मर्ग जांच के दौरान विलंब से प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज होना मोटर दुर्घटना दावा निरस्त करने का आधार नहीं हो सकता तथा केवल इस कारण बीमा कंपनी मुआवजा देने के दायित्व से मुक्त नहीं हो सकती।
*पंकज कुमार वेद एडवोकेट, मंदसौर* से मिली जानकारी अनुसार 21 अप्रैल 2025 की रात लगभग 9: 00 बजे शादाब अली अपनी ड्यूटी समाप्त कर रत्नम ऑटो केयर एंड स्पेयर, शामगढ़ रोड, गरोठ से मोटरसाइकिल द्वारा अपने घर लौट रहे थे। जब वे नायरा पेट्रोल पंप, शामगढ़-गरोठ मार्ग के पास पहुँचे, तभी तेज गति एवं लापरवाहीपूर्वक चलाए जा रहे महिंद्रा बोलेरो पिकअप ने उनकी मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी। दुर्घटना में उन्हें गंभीर सिर की चोटें आईं और उपचार से पूर्व ही उनकी मृत्यु हो गई।
माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत साक्ष्यों से यह सिद्ध हुआ कि मृतक रत्नम ऑटो केयर एंड स्पेयर, शामगढ़ रोड, गरोठ में कार्यरत था तथा माननीय न्यायालय ने वेतन प्रमाण-पत्र एवं अन्य दस्तावेजों के आधार पर उनकी मासिक आय 19000.00 स्वीकार करते हुए, उनकी आयु 26 वर्ष होने के कारण 50% भविष्य की आय (Future Prospects) भी जोड़ी और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित सिद्धांतों के अनुसार क्षतिपूर्ति राशि की गणना की।
मृतक अपने परिवार का मुख्य कमाऊ सदस्य था। उनके पीछे पत्नी रौनक बी, नाबालिक पुत्र शाबाज अली, पिता पीरू मोहम्मद तथा माता अंजुम हैं। माननीय न्यायालय ने पत्नी, पुत्र एवं माता को मृतक का आश्रित मानते हुए बीमा कंपनी को क्षतिपूर्ति राशि प्रदान का अवार्ड पारित किया।
सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी द्वारा दुर्घटना, प्रथम सूचना रिपोर्ट में विलंब, आय एवं अन्य तथ्यों पर अनेक आपत्तियाँ उठाई गईं। किन्तु माननीय न्यायालय ने प्रत्यक्षदर्शी गवाहों, पुलिस अभिलेखों, दस्तावेजी साक्ष्यों तथा माननीय सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों के आधार पर दुर्घटना को प्रमाणित माना। *माननीय न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि दुर्घटना के दिन ही मर्ग कायम कर पुलिस जांच प्रारंभ कर दी गई थी। मर्ग जांच के दौरान लगभग आठ दिन बाद प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज हुई, जिसका दायित्व पीड़ित परिवार पर नहीं डाला जा सकता। अतः केवल FIR दर्ज होने में विलंब के आधार पर बीमा कंपनी मुआवजा देने के दायित्व से मुक्त नहीं हो सकती।*
*मृतक के परिवारजन की ओर से * पंकज कुमार वेद,एडवोकेट* ने प्रभावी पैरवी करते हुए दस्तावेजी साक्ष्य, प्रत्यक्षदर्शी गवाहों एवं सर्वोच्च न्यायालय के प्रासंगिक निर्णयों के आधार पर दावा सिद्ध किया। माननीय न्यायालय ने उनकी दलीलों से सहमत होते हुए मृतक के आश्रितों के पक्ष में ₹41.04 लाख का प्रतिकर तथा दावा प्रस्तुति दिनांक से 7% वार्षिक ब्याज सहित भुगतान करने का अवार्ड पारित किया।
यह निर्णय मोटर दुर्घटना में पीड़ित परिवारों के अधिकारों की रक्षा, बीमा कंपनियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने तथा समयबद्ध न्याय प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।
*गरोठ न्यायालय - MACT गरोठ का महत्वपूर्ण निर्णय - मृतक के आश्रितों को ₹41.04 लाख एवं दावा प्रस्तुति दिनांक से 7% वार्षिक ब्याज देने का आदेश।*

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