*भैसाखेड़ा डेम पर दुर्लभ कॉमन क्रेन की आमद, एक दर्जन प्रवासी पक्षियों ने बनाया डेरा, कई महीनों से डेम क्षेत्र में कर रहे विचरण, स्वच्छ पर्यावरण और बेहतर प्राकृतिक आवास का माना जा रहा संकेत*


जन जागृति संगम न्यूज

जेपी तेलकार
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पिपलिया स्टेशन (जेपी तेलकार)। क्षेत्र के भैसाखेड़ा डेम क्षेत्र में इन दिनों दुर्लभ और आकर्षक कॉमन क्रेन (सामान्य सारस) पक्षियों की आमद ने पर्यावरण प्रेमियों, पक्षी विशेषज्ञों और ग्रामीणों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। पिछले कई महीनों से ये प्रवासी पक्षी डेम और आसपास के खेतों में नियमित रूप से देखे जा रहे हैं। वर्तमान में इनकी संख्या करीब एक दर्जन बताई जा रही है। इनका लंबे समय तक एक ही क्षेत्र में ठहरना इस बात का संकेत है कि भैसाखेड़ा डेम का प्राकृतिक वातावरण, पर्याप्त जल उपलब्धता और भोजन के संसाधन इन पक्षियों के लिए अनुकूल साबित हो रहे हैं। सुबह और शाम के समय डेम के किनारे तथा आसपास के खेतों में इन लंबे पैरों वाले सुंदर पक्षियों को भोजन की तलाश में विचरण करते देखा जा सकता है। कभी शांत जलाशय के किनारे खड़े तो कभी खुले खेतों में समूह बनाकर घूमते इन पक्षियों का मनमोहक दृश्य प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी आकर्षण से कम नहीं है। कई लोग इन्हें अपने कैमरे में कैद करने के लिए भी डेम क्षेत्र पहुंच रहे हैं। जानकारी के अनुसार कॉमन क्रेन दुनिया के सबसे प्रसिद्ध प्रवासी पक्षियों में गिना जाता है। यह पक्षी हर वर्ष हजारों किलोमीटर की लंबी यात्रा कर अपने प्रजनन क्षेत्रों से दक्षिण की ओर प्रवास करता है। सर्दियों के मौसम में यह भारत सहित दक्षिण एशिया के कई हिस्सों में पहुंचता है और जलाशयों, आर्द्रभूमियों तथा खुले कृषि क्षेत्रों को अपना अस्थायी निवास बनाता है। विशेषज्ञों के अनुसार कॉमन क्रेन की लंबाई लगभग 100 से 130 सेंटीमीटर तथा पंखों का फैलाव 180 से 240 सेंटीमीटर तक होता है। इसका पूरा शरीर धूसर (ग्रे) रंग का होता है, जबकि गर्दन काली और सिर पर लाल रंग का विशिष्ट पैच इसकी प्रमुख पहचान है। इसकी लंबी नुकीली चोंच और लंबे पैर इसे अन्य पक्षियों से अलग पहचान दिलाते हैं। भारत में यह पक्षी मुख्य रूप से अक्टूबर से मार्च के बीच राजस्थान, गुजरात, पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश के कुछ जलाशयों एवं कृषि क्षेत्रों में देखा जाता है। मंदसौर-नीमच अंचल में इसका दिखाई देना सामान्य बात नहीं है, इसलिए भैसाखेड़ा डेम पर एक साथ करीब एक दर्जन कॉमन क्रेन का डेरा जमाना पक्षी प्रेमियों के लिए विशेष महत्व रखता है। कॉमन क्रेन का भोजन अनाज, बीज, घास की जड़ें, कीड़े-मकोड़े, छोटे मेंढक, छिपकलियां और अन्य छोटे जीव होते हैं। यही कारण है कि जलाशयों के आसपास स्थित खेत और हरियाली वाले क्षेत्र इनके लिए उपयुक्त भोजन स्थल बन जाते हैं। यह पक्षी उड़ान के दौरान श्वीश् आकार का समूह बनाकर उड़ता है, जो इसकी सबसे प्रसिद्ध विशेषताओं में से एक है। इसकी तेज और दूर तक सुनाई देने वाली आवाज भी इसकी पहचान मानी जाती है। प्रजनन काल में नर और मादा का आकर्षक क्रेन डांस देखने योग्य होता है और माना जाता है कि इनका जोड़ा जीवनभर साथ रहता है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि किसी क्षेत्र में प्रवासी पक्षियों का लगातार आगमन वहां के स्वस्थ पारिस्थितिक तंत्र, स्वच्छ जल स्रोतों और बेहतर जैव विविधता का संकेत होता है। यदि जलाशयों का संरक्षण किया जाए और प्राकृतिक आवास सुरक्षित रहें तो ऐसे दुर्लभ पक्षियों की संख्या भविष्य में और बढ़ सकती है। पर्यावरण प्रेमी पत्रकार नरेंद्र राठौर ने कहना है कि भैसाखेड़ा डेम पर सारस पक्षियों का आगमन पूरे क्षेत्र के लिए सुखद और गौरव का विषय है। यह हमारे प्राकृतिक संसाधनों की समृद्धि और पर्यावरणीय संतुलन को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इन प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा और संरक्षण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। जल स्रोतों को स्वच्छ बनाए रखना, हरियाली बढ़ाना तथा इनके प्राकृतिक आवासों को सुरक्षित रखना आवश्यक है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इन दुर्लभ और खूबसूरत पक्षियों को अपने आसपास देख सकें। वहीं लोगों का कहना है कि यदि भैसाखेड़ा डेम क्षेत्र में पक्षियों के संरक्षण और जागरूकता की दिशा में प्रयास किए जाएं तो यह स्थान भविष्य में बर्ड वॉचिंग (पक्षी अवलोकन) के लिए भी एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है। इससे प्रकृति संरक्षण के साथ-साथ क्षेत्र में पर्यावरण पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
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