*उधारी के 28 लाख रुपए, ब्लैंक चेक और कथित ब्याज वसूली का मामला, संदीप की आत्महत्या के पांच माह बाद पिपलिया डॉक्टर के खिलाफ केस, परिजनों ने लगाया था अधिक रकम मांगने, चेक में मनमानी राशि भरकर कोर्ट में लगाने और जेल भिजवाने की धमकी देने का आरोप, मर्ग जांच में कॉल डिटेल व सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले*

जागृति संगम न्यूज
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पिपलिया स्टेशन (जेपी तेलकार)। ग्राम खोखरा निवासी 42 वर्षीय संदीप पिता श्यामलाल पाटीदार की 24 मई 2026 को हुई आत्महत्या के मामले में पिपलियामंडी पुलिस ने करीब पांच माह बाद पिपलियामंडी निवासी शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप पाटीदार के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। यह मामला एसपी विनोद मीणा के निर्देश पर पुलिस ने मर्ग जांच के दौरान सामने आए मृतक के परिजनों एवं अन्य साक्षियों के बयानों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मोबाइल कॉल डिटेल तथा मृतक के खेत-कुएं पर लगे सीसीटीवी की रिकॉर्डिंग सहित अन्य तथ्यों के आधार पर मामला दर्ज किया है। केस में डॉ. प्रदीप पर उधारी की रकम को लेकर मृतक को कथित रूप से प्रताड़ित करने, ब्याज सहित अतिरिक्त रकम मांगने तथा रकम नहीं देने पर ब्लैंक चेक में अधिक राशि भरकर कोर्ट में लगाने और जेल भिजवाने की धमकी देने के आरोपों का उल्लेख है।
*सुबह खेत-कुएं पर फांसी के फंदे पर मिला था संदीप:-*
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार 24 मई की सुबह ग्राम खोखरा में संदीप पाटीदार की उसके खेत-कुएं पर बने टीनशेड के एंगल से रस्सी के सहारे फांसी लगाने से मृत्यु हुई थी। मृतक के भाई निर्मल पाटीदार ने पुलिस को दी सूचना में बताया था कि दोनों भाई रात में घर पर थे। संदीप करीब एक माह से खेत-कुएं पर सीमेंट की बाउंड्रीवाल का निर्माण कार्य चलने के कारण वहीं सोने के लिए जा रहा था। 23 मई की रात करीब 9 बजे वह खेत पर सोने जाने की बात कहकर घर से निकला था। सुबह करीब 6 बजे तक संदीप घर नहीं लौटा तो भाई निर्मल खेत-कुएं पर पहुंचा। वहां उसने संदीप को टीनशेड के एंगल से रस्सी डालकर फांसी पर लटका हुआ देखा। मौके पर ही उसकी मृत्यु हो चुकी थी। सूचना पर पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की थी।
*मर्ग जांच में सामने आया उधारी का मामला:-*
मर्ग जांच के दौरान पुलिस ने मृतक के भाई निर्मल, पिता श्यामलाल, पत्नी गुणबाला, माता शकुंतला, बहन सीमा, रिश्तेदार शिवनारायण पाटीदार सहित अन्य लोगों के बयान दर्ज किए। पुलिस के अनुसार मृतक की पत्नी गुणबाला, बहन सीमा और रिश्तेदार शिवनारायण ने अपने कथनों में संदीप और डॉ. प्रदीप पाटीदार के बीच पैसों के लेन-देन की जानकारी दी। पुलिस जांच के अनुसार परिजनों ने बताया कि संदीप ने डॉ. प्रदीप से रुपए उधार लिए थे और इसके बदले ब्लैंक चेक दिए थे। परिजनों का आरोप था कि संदीप ने उधारी की रकम वापस कर दी थी, लेकिन इसके बाद भी डॉ. प्रदीप द्वारा उधारी की रकम पर 5 से 10 रुपए सैकड़ा के हिसाब से ब्याज जोड़कर अतिरिक्त राशि की मांग की जा रही थी। पुलिस के मुताबिक परिजनों ने अपने बयानों में आरोप लगाया कि अतिरिक्त रकम नहीं देने पर पहले दिए गए खाली चेक में अधिक राशि भरकर उसे कोर्ट में लगाने और जेल भिजवाने की धमकी दी जाती थी। इसके अलावा गांव और घर पर आकर रुपए को लेकर बेइज्जती करने की धमकी तथा कथित प्रताड़ना की बात भी पुलिस को बताई गई। मर्ग जांच के निष्कर्ष में पुलिस ने एफआईआर में उल्लेख किया है कि इन परिस्थितियों से परेशान होकर संदीप पाटीदार द्वारा आत्महत्या किए जाने की बात सामने आई।
*डॉ. के बयान में 28 लाख नकद देकर ब्लैंक चेक देने का जिक्र:-*
डॉ. प्रदीप पाटीदार से भी पूछताछ कर उनका कथन लिया। डॉ. पाटीदार सूपड़ा निवासी होकर हाल में पिपलियामंडी यशोदादेवी हास्पीटल का संचालन करता है। पुलिस ने उनके कथन का उल्लेख करते हुए बताया है कि डॉ. प्रदीप ने संदीप पाटीदार को कुल 28 लाख रुपए देने की बात कही। साथ ही उनके द्वारा संदीप से ब्लैंक चेक लिए जाने की बात भी कथन में सामने आई। इस प्रकार मर्ग जांच में पुलिस ने मृतक और आरोपी के बीच आर्थिक लेन-देन तथा ब्लैंक चेक से जुड़े पहलू को महत्वपूर्ण माना और इसी आधार पर आगे जांच की। मामले में खेत-कुएं पर पक्का बाड़ा बनाने वाले मिस्त्री का बयान भी पुलिस ने दर्ज किया। एफआई के अनुसार मिस्त्री ने पुलिस को बताया कि घटना से करीब चार दिन पहले 20 मई 2026 की शाम करीब 5 बजे संदीप खेत-कुएं पर मोबाइल फोन पर किसी व्यक्ति से जोर-जोर से गुस्से में बात कर रहा था। बयान के अनुसार बातचीत के दौरान संदीप सामने वाले व्यक्ति को डॉक्टर कहकर ब्लैकमेल नहीं करने तथा उसे फंसाने की कोशिश नहीं करने जैसी बातें कह रहा था।
*बातचीत की रिकार्डिंग सीसीटीवी में सुरक्षित मिली:-*
इसके अलावा मृतक के दोस्तों के भी बयान दर्ज किया। पुलिस ने इन बयानों के साथ पोस्टमार्टम रिपोर्ट, कॉल डिटेल और सीसीटीवी रिकॉर्डिंग सहित उपलब्ध दस्तावेजों का परीक्षण किया। पुलिस का कहना है कि इन सभी तथ्यों को मिलाकर की गई मर्ग जांच में मृतक और डॉ. प्रदीप के बीच आर्थिक लेन-देन तथा कथित प्रताड़ना से जुड़े तथ्य सामने आए। पुलिस ने इस बयान को भी मर्ग जांच का हिस्सा बनाया। जांच के दौरान संदीप के खेत-कुएं पर लगे सीसीटीवी कैमरे की रिकॉर्डिंग भी पुलिस के सामने आई। पुलिस के अनुसार कैमरे में लगी एसडी र्काउ में 20 मई की रिकॉर्डिंग सुरक्षित थी। मृतक के भाई निर्मल पाटीदार द्वारा यह रिकॉर्डिंग पुलिस को उपलब्ध कराए जाने के बाद उसे विधिवत जब्त किया गया और पुलिस ने उसका विश्लेषण किया। इसके साथ ही पुलिस ने मृतक के मोबाइल नंबर की कॉल डिटेल भी प्राप्त कर उसका विश्लेषण किया। जिसमें 20 मई 2026 को शाम 5 बजकर 5 मिनट 44 सेकंड पर संदीप के मोबाइल नंबर से डॉ. प्रदीप पाटीदार के मोबाइल नंबर पर करीब 717 सेकंड यानी लगभग 11 मिनट 57 सेकंड तक बातचीत हुई। पुलिस ने कॉल डिटेल के आधार पर दोनों के बीच मोबाइल संपर्क का भी उल्लेख किया है। जांच में संदीप और डॉ. प्रदीप के बीच मोबाइल पर कई बार बातचीत होना सामने आया।
*केस दर्ज नही होने पर परिजन मिले थे एसपी से:-*
मामले की जांच के दौरान डॉक्टर के रिश्तेदारों व डॉक्टर ने प्रदीप ने संदीप के परिजनों को धमकी दी कि पुलिस में जो बयान जांच में बयान बदल देना न ही तो ठीक नही होगा। यह भी धमकी दी कि डॉ. प्रदीप को भी कुछ होगा तो उसकी जिम्मेदारी तुम्हारी रहेगी। डर के बाद परिजन जिला पुलिस अधीक्षक विनोद मीणा से मिले व पूरी घटना की जानकारी देते हुए मामले में केस दर्ज न ही होने के कारण धमकाने की शिकायत की। एसपी विनोद मीणा ने मामले में तत्काल आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज करने के निर्देश दिए थे।
*केस दर्ज, आरोपी की तलाश जारी :-*
पिपलियामंडी टीआई विक्रमसिंह इवने ने बताया मामले में 24 मई को संदीप की आत्महत्या के बाद पुलिस ने पहले इसे मर्ग के रूप में दर्ज कर जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में मृतक के परिवारजनों और अन्य साक्षियों के बयान लिए गए। इसके बाद आर्थिक लेन-देन, ब्लैंक चेक, कथित ब्याज की मांग और धमकियों से जुड़े आरोप सामने आए। पुलिस ने संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए और खेत पर लगे सीसीटीवी की रिकॉर्डिंग तथा मोबाइल कॉल डिटेल का परीक्षण किया। इन तथ्यों के आधार पर पुलिस ने मर्ग जांच के बाद आत्महत्या के लिए कथित दुष्प्रेरण और ऋण संबंधी कानून के उल्लंघन के मामले में आरोपी डॉ. प्रदीप पाटीदार के खिलाफ  धारा 308 (2) व धारा 108 तथा मध्यप्रदेश ऋणियों का संरक्षण अधिनियम 1937 की धारा 3 और 4 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। आरोपी की गिरफ्ताराी शेष है, मामले की जांच एएसआई संतोष मुनिया कर रहे है।
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