*3 पैथोलॉजी लैब के पंजीयन निरस्त जांच समिति की रिपोर्ट में अनियमितताएं उजागर; दूर बैठे पैथोलॉजिस्ट के नाम पर चल रही थी व्यवस्था, एक प्रकरण उच्च स्तरीय जांच को भेजा*
जन जागृति संगम न्यूज
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नीमच,जिले में नियमों को ताक पर रखकर संचालित पैथोलॉजी लैब और दूर बैठे पैथोलॉजिस्ट के नाम पर जांच रिपोर्ट जारी किए जाने के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई की है। लगातार उठाए गए मामले के बाद विभागीय जांच में भी अनियमितताएं सामने आईं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय ने जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर तीन पैथोलॉजी लैब के पंजीयन तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए हैं। वहीं एक पैथोलॉजिस्ट से संबंधित प्रकरण उच्च स्तरीय जांच के लिए क्षेत्रीय संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं, उज्जैन संभाग को भेजा गया है।
पूर्व में एक पैथोलॉजिस्ट के नाम पर कई लैब संचालित होने, पैथोलॉजिस्ट की मौके पर नियमित मौजूदगी नहीं रहने और दूरस्थ स्थान से जांच रिपोर्ट जारी किए जाने के मामले उजागर किए थे। कुछ लैब में तकनीशियनों द्वारा जांच व्यवस्था संभालने और पैथोलॉजिस्ट के डिजिटल हस्ताक्षर से रिपोर्ट जारी किए जाने के सवाल भी उठाए गए थे।
तीन लैब के पंजीयन निरस्त
विभागीय आदेश के अनुसार सुरेश कुमार कछावा विजया पैथोलॉजी लैब, मनासा, पवन पाटीदार मनासा पैथोलॉजी लैब, तथा नीमच के एक अन्य सेंटरके पंजीयन निरस्त किए गए हैं। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग, उज्जैन संभाग के निर्देश पर गठित जांच समिति ने मौके पर जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। रिपोर्ट के आधार पर विभाग ने संबंधित लैब की व्यवस्था को
नियमों के अनुरूप नहीं माना। पैथोलॉजिस्ट की मौजूदगी
पर उठे थे सवाल- पड़ताल के दौरान यह सवाल सामने आया था कि जिन पैथोलॉजिस्ट के नाम पर लैब पंजीकृत हैं, उनकी वास्तविक उपस्थिति कितनी रहती है। नमूने लेने से लेकर जांच और रिपोर्ट प्रमाणित करने तक तकनीशियनों की भूमिका तथा डॉक्टर की अनुपस्थिति को लेकर भी सवाल उठे थे। डिजिटल हस्ताक्षर से रिपोर्ट जारी किए जाने का मामला भी गंभीर चिंता का विषय रहा।
एक प्रकरण उच्च स्तरीय जांच को भेजा- आदेश में पैथोलॉजिस्ट डॉ. सलोनी जैन एवं डॉ. मनीष पंथ से संबंधित प्रकरणों का भी उल्लेख है। इनमें डॉ. सलोनी जैन से संबंधित प्रकरण को आगे की कार्रवाई के लिए क्षेत्रीय संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं, उज्जैन संभाग को भेजा गया है
अब अन्य लैब पर भी नजर -
तीन लैब के पंजीयन निरस्त होने के बाद जिले की अन्य पैथोलॉजी लैब की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। पंजीकृत पैथोलॉजिस्ट की वास्तविक उपस्थिति, जांच प्रक्रिया और रिपोर्ट प्रमाणित करने की व्यवस्था की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि मरीजों की जांच रिपोर्ट की विश्वसनीयता से किसी स्तर पर समझौता न हो

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