*जन्माष्टमी पर 504 बच्चे बने राधा-कृष्ण, सजा पूरा पंडाल द्वारिका नगरी जैसा* *कुमुदलता जी ने बताया श्रीकृष्ण का जैन धर्म में महत्व, 11 श्रेष्ठ कान्हा और 11 श्रेष्ठ राधा को किया पुरस्कृत*
जन जागृति संगम न्यूज़
एमपी ब्यूरो चीफ जगदीश राठौर 9425490641
इंदौर। संकल्पमय चातुर्मास-2026 के अंतर्गत जन्माष्टमी के पावन अवसर पर आज धर्मसभा में भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति, बाल प्रतिभा और आध्यात्मिक संदेश का अद्भुत संगम देखने को मिला।
साध्वी डॉ. श्री कुमुदलताजी महाराज साहब** ने श्रीकृष्ण के जीवन चरित्र एवं जन्माष्टमी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि श्रीकृष्ण केवल भारतीय संस्कृति के महान पुरुष ही नहीं, बल्कि जैन धर्म की परंपरा में भी उनका विशेष स्थान रहा है। उन्होंने बताया कि श्रीकृष्ण ने धर्म और समाज की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा अनेक प्रसंगों में तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ से उनका संबंध भी वर्णित है।
साध्वीजी ने श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े प्रसंग सुनाते हुए कहा कि **जैसे विशाल वृक्ष की छाया में अनेक लोग आश्रय पाते हैं, वैसे ही श्रीकृष्ण का व्यक्तित्व अपने समय में असंख्य लोगों के लिए आशा, साहस और संरक्षण का आधार बना।** उनके जीवन से हमें परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, धर्म और कर्तव्य के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।
*504 बच्चे बने राधा-कृष्ण, पंडाल बना द्वारिका*
जन्माष्टमी कार्यक्रम का सबसे आकर्षक केंद्र **504 नन्हे-मुन्ने बच्चों का राधा-कृष्ण स्वरूप** रहा। बच्चे सुंदर राधा-कृष्ण की वेशभूषा में सजकर कार्यक्रम में पहुंचे और भव्य **रैंप वॉक** किया। जब नन्हे बच्चे कान्हा और राधा के रूप में मंच पर उतरे तो ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वयं द्वारिका नगरी में श्रीकृष्ण और राधा के बाल स्वरूप साकार हो उठे हों। बच्चों की मनमोहक प्रस्तुतियों से पूरा पंडाल मानो द्वारिका बन गया।
इस पूरे भव्य कार्यक्रम की संपूर्ण जिम्मेदारी एवं संचालन साध्वी श्री पद्मकीर्तिजी महाराज साहब ने अथक परिश्रम, समर्पण और विशेष प्रयासों के साथ संभाला। उनकी मेहनत और कुशल संचालन से कार्यक्रम अत्यंत सुंदर एवं व्यवस्थित रूप से संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में 11 श्रेष्ठ कान्हा एवं 11 श्रेष्ठ राधाओं का चयन कर उन्हें पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम के लाभार्थी अरुणजी, चंदा, गिरिराज, जया, भूमि, हिमांशी एवं निधि बाम परिवार (उन्हेल वाले) रहे। लाभार्थी परिवार द्वारा विजेता बच्चों को पुरस्कार प्रदान किए गए।सबसे बड़ी बांसुरी और पंचकण की हांडी बनी आकर्षण*
जन्माष्टमी की भव्यता को और बढ़ाने के लिए सभा में **सबसे बड़ी बांसुरी एवं पंचकण की हांडी** भी विशेष रूप से रखी गई, जो श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र रही।
*मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने किए साध्वीजी के दर्शन*
कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के कैबिनेट मंत्री *कैलाश विजयवर्गीय** भी पधारे। श्रीसंघ की ओर से उनका आत्मीय स्वागत एवं सम्मान-सत्कार किया गया।
मंत्री विजयवर्गीय ने साध्वीजी से आशीर्वाद प्राप्त कर सभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने प्रसिद्ध भजन **“छोटी-छोटी गैया, छोटे-छोटे ग्वाल”** भी प्रस्तुत किया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।जन्माष्टमी के इस संपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन **श्री वर्धमान बहुश्रुत मंडल** द्वारा किया गया। मंडल के सदस्यों ने अथक परिश्रम एवं सुंदर व्यवस्थाओं के साथ कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 504 बच्चों की मनमोहक प्रस्तुतियों, श्रीकृष्ण के जीवन संदेश और भक्ति से सराबोर वातावरण ने जन्माष्टमी समारोह को यादगार बना दिया।
समारोह का संयोजन ओर संचालन जिनेश्वर जैन ने किया।




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