*गरबा पंडालों में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर उषा ठाकुर का बड़ा बयान, मूर्ति पूजा नहीं करने वालों पर रोक की मांग* *बोलीं- हर साल साढ़े चार लाख हिंदू लड़कियां गैर-हिंदू युवकों के साथ चली जाती थीं तिलक-कलावा लगाकर पहचान छिपाने का भी लगाया आरोप, व्यावसायिक गरबा आयोजनों के स्वरूप पर उठाए सवाल*
जनक जागृति संगम न्यूज एमपी ब्यूरो चीफ जगदीश राठौर 9425490 64 1
इंदौर। मध्य प्रदेश के सबसे बड़े शहर इंदौर में नवरात्रि के दौरान होने वाले गरबा आयोजनों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री उषा ठाकुर ने गरबा पंडालों में गैर-हिंदुओं की एंट्री को लेकर बयान देते हुए मूर्ति पूजा नहीं करने वाले लोगों के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग की है। ठाकुर ने कहा कि गरबा धार्मिक आस्था और शक्ति की साधना से जुड़ा आयोजन है, इसलिए इसकी धार्मिक पहचान और स्वरूप बनाए रखना जरूरी है।
4.5 लाख लड़कियों को लेकर किया दावा
उषा ठाकुर ने दावा किया कि पहले हर साल करीब साढ़े चार लाख हिंदू लड़कियां गरबा आयोजनों के दौरान गैर-हिंदू युवकों के साथ चली जाती थीं और इसके बाद अगले वर्ष करीब नौ लाख बच्चों के जन्म की बात कही। उन्होंने इसे जनसांख्यिकी पर असर से जोड़ते हुए गरबा आयोजनों में प्रवेश को लेकर सख्ती की आवश्यकता बताई। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक इस दावे के समर्थन में उन्होंने कोई आधिकारिक स्रोत, सर्वे या आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया है।
तिलक और कलावा लगाकर पहचान छिपाने का आरोप
ठाकुर ने आरोप लगाया कि कुछ लोग अपनी पहचान छिपाकर गरबा पंडालों में प्रवेश करते हैं। उनके मुताबिक ऐसे लोग कभी तिलक लगाकर तो कभी कलावा बांधकर गरबा आयोजनों में शामिल होते हैं। ठाकुर ने आरोप लगाया कि इस तरह कुछ लोग हिंदू युवतियों को भ्रमित करने का प्रयास करते हैं। उन्होंने ऐसे मामलों को रोकने के लिए प्रवेश व्यवस्था में पहचान की जांच की जरूरत पर जोर दिया।
मूर्ति पूजा नहीं करने वालों के प्रवेश पर रोक की मांग
भाजपा विधायक ने कहा कि जिन लोगों की आस्था मूर्ति पूजा में नहीं है, उन्हें गरबा पंडालों में प्रवेश नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल की ओर से गरबा आयोजनों को लेकर चलाए जा रहे अभियान का भी समर्थन किया। उनके बयान के बाद गरबा आयोजनों में प्रवेश और धार्मिक पहचान को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है।
व्यावसायिक गरबा आयोजनों पर भी सवाल
उषा ठाकुर ने केवल प्रवेश व्यवस्था ही नहीं, बल्कि गरबा के बदलते स्वरूप पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि गरबा शक्ति की साधना, धर्म और संस्कृति से जुड़ा पर्व है, लेकिन व्यावसायिक आयोजनों के कारण इसका स्वरूप बदलता जा रहा है। उनके अनुसार गरबा को केवल मनोरंजन, आधुनिक पहनावे, गहनों और टैटू के प्रदर्शन तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए।
नवरात्रि से पहले गरबा पर सियासत गरम
नवरात्रि से पहले मध्यप्रदेश में गरबा आयोजनों में प्रवेश को लेकर नेताओं के लगातार बयान सामने आ रहे हैं। ऐसे में उषा ठाकुर के ताजा बयान ने इस मुद्दे को एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। वहीं, उनके द्वारा बताए गए 4.5 लाख और 9 लाख के आंकड़ों के स्वतंत्र स्रोत या आधिकारिक आधार की पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं हुई है।
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