*विलुप्त होती लोककला संजा को दीवार पर बनाकर बालिकाओं ने बगलेस मनाया* *तो बालकों ने मिट्टी की मूर्तियां बनाई*
जन जागृति संगम न्यूज
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शा माध्यमिक विद्यालय देवरी खवासा में आज बच्चों ने बगलेस का अलग ही तरीके से आनंद लिया।
मालवा अंचल की विलुप्त होती लोककला को जीवित रखने के लिए शिक्षक शैलेंद्र जोशी के निर्देशन में बालिकाओं ने गोबर, फूल पत्तियां और रंगीन पन्नियों से दीवार पर पाटला की आकृति बनाई।
जोशी सर ने बताया 16 दिन तक चलने वाले इस आयोजन में प्रतिदिन दीवार पर अलग- अलग प्रकार की आकृतियां बनाई जाती है।
और ऐसी मान्यता है कि पितृ पक्ष के इन 16 दिनों में संजा बाई अपने मायके में रहती है।किशोरी और कुंवारी कन्याएँ रात्रि में संजा के गीत गाती हैं जिसमें मायका, भाई,भाभी, सखियाँ, ससुराल आदि का बहुत सुंदर भाव मिलता है।
लोकमान्यता में तो इसे बेटियों के मायके में आने की खुशी और *"बेटियाँ कभी पराई नहीं होती"* के भाव से भी जोड़ा गया है।
बालिकाओं ने प्रतिदिन अलग अलग आकृतियां बनाने का संकल्प भी लिया।
वहीं बालकों ने शिक्षक ईश्वरलाल प्रजापति के निर्देशन में मिट्टी से मूर्तियां आदि बनाई
प्रधानाध्यापक श्रीमती प्रियंका देवड़ा ने बताया कि बच्चों ने खूब मेहनत की ओर आज के बगलेस डे का खूब आनंद लिया। इन्हें विद्यालय द्वारा पुरस्कृत किया जाएगा।







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