// सफलता की कहानी // *आजीविका मिशन से बदली कारी बाई की जिंदगी, किराना दुकान और फोटोकॉपी केंद्र से बनीं आत्मनिर्भर* *स्व-सहायता समूह से जुड़कर शुरू किया स्वरोजगार*
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नीमच,कलेक्टर हिमांशु चंद्रा के मार्गदर्शन तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत अमन वैष्णव की सक्रिय भूमिका एवं ग्रामीण आजीविका मिशन के सतत प्रयासों से जिले में महिलाओं को स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आत्मनिर्भर एवं स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है।
मनासा विकासखंड के ग्राम सुंडी की श्रीमती कारी बाई कछावा इसकी प्रेरक मिसाल हैं। आज वे स्वयं का व्यवसाय संचालित कर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं। ग्राम सुंडी, ग्राम पंचायत भेरपुरा, मनासा में वर्ष 2018 से गांव की महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़ने की शुरुआत हुई। वर्तमान में ग्राम पंचायत क्षेत्र में 20 महिला स्व-सहायता समूह गठित हो चुके हैं।
समूह से मिला संबल,शुरू किया अपना व्यवसाय श्रीमती कारी बाई कछावा चारभुजा स्व-सहायता समूह सुंडी से 1 फरवरी 2023 को जुड़ीं। समूह से प्राप्त वित्तीय सहयोग और आजीविका गतिविधियों से जुड़कर उन्होंने वर्ष 2024 में किराना दुकान एवं फोटोकॉपी का कार्य शुरू किया। इस व्यवसाय से वर्तमान में उन्हें प्रतिदिन लगभग 500 रुपये की आय हो रही है। इसके साथ वे कृषि कार्य भी करती हैं। समूह को आरएफ से 20 हजार रुपये, सीआईएफ से 1 लाख रुपये तथा सीसीएल से 1.50 लाख रुपये की राशि प्राप्त हुई है।
कारी बाई ने समूह से 34,700 रुपये का व्यक्तिगत ऋण भी प्राप्त किया। आय में हुआ उल्लेखनीय इजाफा आजीविका मिशन से जुड़ने से पहले कारी बाई की व्यक्तिगत मासिक आय लगभग 9,850 रुपये थी, जो अब बढ़कर लगभग 15,000 रुपए हो गई है। वहीं परिवार की मासिक आय 16,500 रुपये से बढ़कर लगभग 26,800 रुपये हो गई है। इस प्रकार परिवार की मासिक आय में 10,300 रुपये की वृद्धि हुई है।
महिला सशक्तिकरण की दिशा में बढ़ते कदम कारी बाई अब स्वयं आत्मनिर्भर बनने के साथ गांव की अन्य महिलाओं को भी घर से बाहर निकलकर स्वरोजगार एवं आजीविका गतिविधियों से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं। महिला स्वराज और आत्मनिर्भरता की दिशा में स्व-सहायता समूहों को सशक्त माध्यम बनाने के प्रयासों से ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जुड़ने और अपनी आय बढ़ाने के अवसर मिल रहे हैं। कारी बाई अपनी सफलता के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तथा जिला प्रशासन के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहती हैं कि आजीविका मिशन से जुड़ने के बाद उन्हें आर्थिक रूप से आगे बढ़ने का अवसर मिला है। उनका कहना है कि वे आगे भी अन्य महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर आत्मनिर्भर होने के लिए प्रेरित करती रहेंगी।

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