*पूर्व गृह मंत्री हिम्मत कोठारी एसपी कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे, बोले- कई बार मिलने के बाद भी नहीं मिला न्याय*
जन जागृति संगम न्यूज
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रतलाम। जिले में बुधवार को उस समय राजनीतिक हलचल तेज हो गई, जब मध्यप्रदेश के पूर्व गृह मंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता हिम्मत कोठारी पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे और एसपी के चेंबर के बाहर धरने पर बैठ गए। पूर्व मंत्री का आरोप है कि भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं मीसाबंदी बसंत पुरोहित से जुड़े मामले में लगातार पुलिस प्रशासन से न्याय की मांग की जा रही है, लेकिन कई बार मुलाकात और चर्चा के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
पूर्व गृह मंत्री हिम्मत कोठारी ने नाराजगी जताते हुए कहा कि उन्होंने कई बार पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर मामले की जानकारी दी और उचित कार्रवाई की मांग की, लेकिन प्रशासन की ओर से अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए। उन्होंने कहा कि जब एक पूर्व जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ राजनीतिक कार्यकर्ता की बात नहीं सुनी जा रही है, तो आम जनता की समस्याओं का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
धरने के दौरान एसपी कार्यालय परिसर में काफी देर तक राजनीतिक कार्यकर्ताओं और समर्थकों की आवाजाही बनी रही। भाजपा कार्यकर्ताओं में भी इस मामले को लेकर नाराजगी दिखाई दी। पूर्व मंत्री ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ नागरिकों को सम्मान मिलना चाहिए, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।
इस घटनाक्रम के बाद प्रदेश की राजनीति भी गरमा गई। Madhya Pradesh Congress Committee ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सरकार और पुलिस प्रशासन पर तीखा हमला बोला। कांग्रेस ने अपने पोस्ट में लिखा कि “मोहन राज में सिर्फ जनता ही नहीं, जनप्रतिनिधि भी परेशान हैं। नाकारा गृह मंत्री की यह पुलिस एक पूर्व जनप्रतिनिधि को उचित सम्मान भी नहीं दे पा रही है। रतलाम में पूर्व गृह मंत्री हिम्मत कोठारी एसपी के आगे धरने पर बैठने को मजबूर हैं। न्याय अब दूर की कौड़ी हो गई है और इस अराजकता में हर कोई पीस रहा है।”
कांग्रेस ने आगे कहा कि जो व्यक्ति कभी प्रदेश का गृह मंत्री रहा, आज वही अपनी ही सरकार में धरना देने को मजबूर है। पार्टी ने प्रदेश की कानून व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इसे सरकार की विफलता बताया।
घटना के बाद जिले की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक गलियारों में इस पूरे घटनाक्रम को प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच बढ़ती दूरी के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि देर शाम तक पुलिस प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया था।
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