*मधुबनी की बारीक रेखाओं में आस्था और संस्कृति के रंग भरतीं सुनीता सिसोदिया* *15 वर्षों से चित्रकला को साधना मानकर रच रहीं अपनी अलग पहचान*


जन जागृति संगम न्यूज
9302003334
(दिनेश प्रजापति)

मंदसौर। महीन रेखाओं का अनुशासन, रंगों की जीवंतता और हर आकृति में छिपा कोई भाव-मधुबनी चित्रकला की यही खूबसूरती मंदसौर की कलाकार सुनीता सिसोदिया को करीब 15 वर्षों से लगातार अपनी ओर खींच रही है।


उनके लिए चित्रकला महज रंगों और रेखाओं को कागज पर उतारने की कला नहीं, बल्कि मन की भावनाओं, आस्था और भारतीय संस्कृति को अभिव्यक्त करने का माध्यम है। मधुबनी की पारंपरिक शैली से प्रभावित सुनीता ने इसे अपनी कला-साधना और पहचान का हिस्सा बना लिया वो चाहती हैं कि मधुबनी चित्रकला के माध्यम से भारतीय आस्था, संस्कृति और परंपराओं की सुंदरता नई पीढ़ी और दुनिया के सामने पहुंचे तथा युवा भी इस समृद्ध पारंपरिक कला से जुड़ें। 


देवी-देवताओं, पौराणिक प्रसंगों, नारी शक्ति, प्रकृति और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़े विषय उनके प्रिय है। खासकर देवी-देवताओं के चित्र बनाते समय उनकी कोशिश रहती है कि चित्र में  आकृति की सुंदरता के साथ श्रद्धा और सकारात्मक भाव भी दिखाई दें। उनका मानना है कि कलाकार जिस भावना से कोई चित्र रचता है, उसका स्पर्श देखने वाले तक भी पहुंचता जिसे देखकर दर्शक केवल चित्र की सुंदरता की प्रशंसा न करे, बल्कि उसके पीछे छिपी कहानी, संस्कृति और भावना को भी महसूस करे।  


मंदसौर की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत उनके लिए प्रेरणा का स्त्रोत है। भगवान पशुपतिनाथ मंदिर, शिवना नदी, स्थानीय लोकजीवन और क्षेत्र की परंपराओं को मधुबनी शैली में चित्रित करने की उनकी इच्छा है। इसके जरिए वे चाहती हैं कि मंदसौर की स्थानीय संस्कृति और विरासत को लोककला के माध्यम से व्यापक पहचान मिले 
  

कला के क्षेत्र में उन्हें विभिन्न सम्माननीय लोगों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों से मिली सराहना और प्रोत्साहन ने उनकी कला-यात्रा को नई ऊर्जा दी है। सुनीता इसे अपनी उपलब्धि के साथ एक जिम्मेदारी भी मानती हैं। उनका प्रयास है कि हर नई कलाकृति में पहले से कुछ नया और बेहतर करने की कोशिश दिखाई दे।

सुनीता की आकांक्षा : अपनी कला को मंदसौर से प्रदेश, देश और अंतर्राष्ट्रीय मंच तक ले जाना उनके लिए कला एक पहचान से कहीं आगे है। वह उनकी भावनाओं की भाषा है, श्रद्धा का स्वर है और वर्षों से चली आ रही एक ऐसी साधना है, जिसमें मधुबनी की हर बारीक रेखा के साथ हर रंग भारतीय संस्कृति का सजीव रुप लेता 

टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

जन जागृति संगम न्यूज : संपादक कमलेश राठौर 9302003334

*सोयाबीन की कटाई करने गई श्रीमती रीना बाई की खेत में हुई डिलीवरी*

*नारायणगढ़ में त्रिकुटा पर्वत बना आस्था का केंद्र, CISF की पहली तनख्वाह मां के चरणों में अर्पित*

दुर्गा नवमी पर साहू तेली समाज ने की मां वैष्णो देवी की महा आरती

*मोगिया आदिवासी समाज की जिला स्तरीय बैठक मोड़ी माता धाम पर संपन्न, सर्वसम्मति से नई कार्यकारिणी गठित*

*अफीम नीति 2026-27 में बढ़ा पात्रता का दायरा: उप नारकोटिक्स आयुक्त श्री नरेश बुंदेल* *4 हजार से अधिक अतिरिक्त किसानों को मिल सकेंगे लाइसेंस*

*नारायणगढ़ में दो बाइकों की भिड़ंत, तीन युवकों की जान गई*

💥 ब्रेकिंग न्यूज़💥 बिना लाइसेंसी खाद विक्रेता फर्म पर कृषि विभाग का चला हंटर💥 अवकाश के दिन भी किसानों के हित में की गई प्रभावशाली कार्यवाही💥

शांति समिति की बैठक संपन्न

*कलेक्टर दिव्यांक सिंह के किया डेरी फार्म हाउस पशुपालन का अवलोकन **जन विश्वास अभियान के अंतर्गत*